नई दिल्ली. अगले साल होने जा रहे लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी के कयास काफी पहले से लगाए जा रहे हैं। हालांकि भाजपा या कांग्रेस ने इन्हें अपना पीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है और न ही दोनों के गठबंधनों एनडीए और यूपीए ने इन पर अपनी मुहर लगाई है। लेकिन फिर भी दोनों नेताओं को लेकर लोगों में उत्साह है इसलिए भी इनकी तुलना अक्सर की जाती है। दोनों नेताओं के अपने-अपने समर्थक हैं जो इलाकों, उम्र, आय, लिंग और विचारधारा के हिसाब से बंटे हुए हैं।
ओपन मैगजीन और सी-वोटर के सर्वे में कांग्रेस के युवा और बीजेपी के वरिष्ठ नेता के लिए लोगों की अलग-अलग पसंद सामने आई है। इसमें कई चौंकाने वाले संकेत देखने को मिल रहे हैं। इस सर्वे में देश भर से 10,136 लोगों को रैंडम तरीके से शामिल किया गया था। इसमें से पहली बार में 14 जनवरी से 5 फरवरी के बीच कुछ लोगों का इंटरव्यू किया गया। इसके बाद 6 फरवरी से 9 फरवरी के बीच 1,715 लोगों का डिटेल में इंटरव्यू लिया गया। ओवरऑल सर्वे में मोदी राहुल से बाजी मारते हैं।
सर्वे कराने वाले संगठनों का कहना है कि इस सर्वे के रिजल्ट में नेशनल लेवल पर 3 फीसदी और रीजनल लेवल पर 5 फीसदी का अंतर आ सकता है। पुरुषों के बीच कराए सर्वे में मोदी और राहुल के बीच में 19 फीसदी मतों का अंतर आ जाता है तो महिलाओं के बीच यह अंतर सिमटकर 6 प्रतिशत रह जाता है। मोदी सवर्ण हिंदुओं और ओबीसी कैटेगरी में राहुल से बाजी मार ले जाते हैं जबकि जनजातीय और मुस्लिम वर्ग के बीच अपेक्षा के अनुरूप राहुल गांधी ज्यादा लोकप्रिय हैं। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सर्वे के मुताबिक दक्षिण भारत में भी मोदी की आंधी है और राहुल गांधी से युवा भी नाउम्मीद हैं।
दूसरी ओर, दैनिक भास्कर डॉट कॉम की ओर से कराए गए
ऑनलाइन पोल में अधिकांश लोग नरेंद्र मोदी को ही अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। 89 फीसदी पाठकों का मानना है कि नरेंद्र मोदी ही अगले प्रधानमंत्री होने चाहिए। जबकि राहुल गांधी के पक्ष में सिर्फ 5 फीसदी लोगों ने वोट किया। वहीं, नीतीश कुमार और मायावती को दो प्रतिशत लोग ही प्रधानमंत्री बनना देखना चाहते हैं। मुलायम सिंह यादव के पक्ष में सिर्फ एक फीसदी वोट पड़े।
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