बहुत मिले वादे, पूरे नहीं हुए :
रणछोड़भाई पदचिंह की पहचान में माहिर थे। इनके आधार पर पदचिंह वाला व्यक्ति किस ओर गया होगा। इसका सटीक अनुमान लगा लेते थे। पाकिस्तानी सेना के आतंक से व्यथित होकर पेथापुर-पाकिस्तान के गथडो गांव में 300 एकड़ भूमि व 30 सांढ़ सहित पशुधन छोड़ कर भारत आए थे। बाद में लींबाणा गांव स्थित ननिहाल में स्थायी हुए। 31 साल दो महीने 26 दिन तक रणछोड़भाई पुलिस सेवा में रहे।