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अगर ये दो शख्स न होते तो अब तक गिर में एक भी शेर न बचता

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जूनागढ़। गुजरात के विश्व विख्यात फॉरेस्ट ‘गिर’ का नाम सुनते ही नजरों के सामने सिंहों का झुंड आ जाता है। एशियाटिक लायंस की शरणस्थली ‘गिर’ में आज 411 सिंह चैन की सांस ले रहे हैं। दुनिया के इन खूंखार सिंहों का दीदार करने के लिए आज गिर फॉरेस्ट में देशी-विदेशी सैलानियों की लाइन लगी रहती है।

गुजरात टूरिज्म के ब्रांड एंबेसेडर और बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी एक बार कहा था ‘अगर आपने गिर फॉरेस्ट और सिंहों को नहीं देखा तो फिर क्या देखा’। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुछ दशक पहले तक यहां सिंहों की संख्या मात्र 20 के करीब ही बची थी। कारण था, शौक के लिए इनका अंधाधुंश शिकार।

रजवाड़ों और उसके बाद अंग्रेजी शासन काल में यहां सिंहों का अत्यधिक शिकार हुआ और सिंहों से खचाखच इस घने जंगल में वीरानी छाने लगी। लेकिन इसी बीच इन्हें बचाने दो शख्स आगे आए और 112 साल पहले इनके द्वारा लिए गए निर्णयों के कारण गिर फॉरेस्ट फिर से सिंहों की दहाड़ों से गूंजने लगा।


आगे पढ़िए, कौन थे ये लोग, जिन्होंने गिर के इन दुर्लभ सिंहों को नया जीवनदान दिया और कैसे...


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