जिस तरह ‘बंगाल टाइगर’ और ‘एशियाटिक चीते’ रहवास के अभाव की वजह से कम होते गए, वही हाल सिंहों का भी हुआ। सिंहों के मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी होती है कि उनका अपना इलाका होता है। इसलिए अगर जंगल में सिंहों की तादात ज्यादा है तो उनके लिए जगह भी बड़ी होनी चाहिए। सिंहों की संख्या घटने का मुख्य कारण 1800 ईसवी में आई बंदूके भी रहीं, क्योंकि बंदूकों के निर्माण के बाद सिंहों का शिकार करना आसान हो गया। इसी का नतीजा रहा कि भारत ही नहीं, बल्कि ईरान जैसे देश में भी, जहां एशियाटिक लायंस की भरमार थी, सिंहों का नामो-निशान सा मिट गया।