सन् 1901 में लॉर्ड कर्जन जूनागढ़ आए, तब यहां के नवाब ने उन्हें सिंहों के शिकार करने का निमंत्रण दिया। इस समय सिंहों की संख्या तेजी से घट रही थी, इसलिए कर्जन ने शिकार से इंकार कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने नवाब को सिंहों के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए प्रोत्साहित भी किया। कर्जन की बात नवाब को इतनी पसंद आई कि उन्होंने जूनागढ़ में वन्यजीव के संरक्षण के लिए एक संस्था बनाई। यह देश की पहली संस्था थी। इसके साथ ही जूनागढ़ में सिंहों को शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।