सन् 1913 में की गई गिनती के अनुसार यहां मात्र 20 सिंह ही बचे थे। सिंहों को बचाने के प्रयास रंग लाते गए और सन् 1938 तक यहां शेरों की संख्या 200 तक पहुंच गई। सन् 2005 की गणना के अनुसार सिंहों की संख्या बढ़ती हुई 359 तक पहुंच गई। आज गिर में 411 सिंह हैं और यह लॉर्ड कर्जन की सलाह और नवाब के प्रयासों से ही संभव हो सका। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा सन् 1955 में ‘सिंहों के शिकार पर प्रतिबंध’ कानून ने भी इसमें महती भूमिका निभाई।