जींद. अदालतें रेप मामलों में शायद अब अधिक संवेदनशील होने लगी हैं। इसका ताजा उदाहरण यहां की एक अदालत का है। गैंगरेप में अपना फैसला साढ़े चार महीने में ही दे दिया है। यानी लोमहर्षक घटना के घटने के तत्काल बाद ही शुरू की गई कानूनी कार्रवाई इस अवधि में पूरी कर ली गई।
सच्चाखेड़ा में गैंगरेप के बाद दलित किशोरी के आत्मदाह के बहुचॢचत मामले में शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएन भारती की अदालत ने दो दोषियों को आजीवन कारावास व दस-दस हजार रुपए की सजा सुनाई है।
जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में एक नाबालिग आरोपी का केस जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है। जबकि चार दिन पहले दो अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया था।
अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
सच्चाखेड़ा किशोरी गैंगरेप व आत्मदाह मामले में नरवाना सदर पुलिस ने 6 अक्टूबर 2012 को आरोपी प्रदीप, संदीप उर्फ संजीव, मनोज, मीना व नवीन के खिलाफ 376 टू जी, 306 व 34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत ने प्रदीप व संदीप उर्फ संजीव को दोषी करार दिया था, जिस पर उन्हें शुक्रवार को सजा सुनाई। इसमें धारा 376 टू जी के तहत दोनों को आजीवन कारावास व पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना, धारा 306 के तहत 10-10 साल की कैद व पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने पर दोषियों को दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दोनों पाए गए थे दोषी
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएन भारती की अदालत ने मामले में सच्चाखेड़ा गांव निवासी प्रदीप, संदीप उर्फ संजीव सामूहिक दुष्कर्म करने व आत्महत्या के लिए मजबूर करने के दोषी पाए गए। अदालत ने 18 फरवरी को इन दोनों युवकों को दोषी करार दिया था, जिस पर शुक्रवार दोपहर बाद दोनों को उम्रकैद की सजा सुना दी।
मुख्य आरोपी प्रदीप के भाई हरियाणा पुलिस के जवान मनोज व उसकी भाभी मीना को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। नाबालिग आरोपी नवीन की सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट में चल रही है।
कोर्ट में लगा रहा जमावड़ा
गैंगरेप के दोषियों को सजा सुनाने की तारिख होने के चलते शुक्रवार सुबह से ही मीडियाकर्मी व अन्य लोग कोर्ट में जमा होना शुरू हो गए थे।
दोपहर बाद जब सजा सुनाने का समय आया तो सभी मीडिया कर्मी, वकील व अन्य लोगों का जमावड़ा लगा दिखाई दिया। लंच के बाद करीब ढाई बजे एडीजे आरएन भारती ने दोषी प्रदीप व संदीप उर्फ संजीव को उम्रकैद व 10-10 हजार रुपए की सजा सुनाई।
यह था मामला
6 अक्टूबर 2012 को सच्चाखेड़ा गांव में वाल्मीकि समुदाय की 16 वर्षीया शर्मिला दोपहर के समय गली से गुजर रही थी। तभी पड़ौसी युवक प्रदीप ने उसका हाथ पकड़कर अपने मकान में घसीट लिया। प्रदीप के मकान में संदीप उर्फ संजीव ने लड़की और प्रदीप को कमरे में बंद कर बाहर से कुंडी लगा दी थी।
कमरे में नवीन पहले से कमरे में मौजूद था। प्रदीप व नवीन ने शर्मिला के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद शर्मिला अपने ताऊ के घर पहुंची और मिट्टी का तेल छिड़ककर खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसी लड़की को रोहतक पीजीआई में ले जाया गया, जहां उसने उसी दिन ही दम तोड़ दिया था।
मजिस्ट्रेट के समक्ष ये दिए थे बयान
पीडि़ता शर्मिला ने दम तोडऩे से पहले मजिस्ट्रेट तरणजीत कौर के समक्ष दिए में बयान में कहा था कि उसके साथ पहले प्रदीप ने फिर नवीन ने दुष्कर्म किया।
प्रदीप के भाई मनोज व उसकी भाभी मीना व संदीप उर्फ संजीव ने सहयोग दिया। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म करने व आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर कार्रवाई की।
सोनिया गांधी व सांसदों का दल भी पहुंचा था गांव
सच्चाखेड़ा में दलित किशोरी के साथ गैंगरेप व आत्मदाह करने की घटना ने हरियाणा समेत पूरे देश में हलचल मचा दी थी। गैंगरेप कांड के बाद नौ अक्टूबर को कांगे्रस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने सच्चा खेड़ा का दौरा किया था।
सोनिया गांधी व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस दौरान पीडि़त परिवार के साथ करीब दस मिनट बातचीत कर दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद दिल्ली से 17 सांसदों का दल भी सच्चाखेड़ा में घटना का जायजा लेने व पीडि़त परिवार को संवेदना व्यक्त करने पहुंचा था।