80 के दशक में किताबों की दुकान से अपना करियर शुरू करने वाला गोपाल गोयल कांडा जिंदगी में लगातार असफल होता रहा। किताब की दुकान बंद हुई तो इलेक्ट्रानिक्स शॉप खुली और फिर जूतों का कारोबार। लेकिन सबके सब फ्लॉप।
शायद, असफलता के धक्कों ने सफल होने के उसके सपनों को सनक में तब्दील कर दिया। अब उसने सफल होने का वह तरीका ढूंढा जिसकी बदौलत चंद सालों में ही कारोबार से लेकर राजनीति तक के हर फन में उसने सफलता के ऐसे झंडे गाड़े कि लोग उसे भगवान मानने लगे।
लेकिन, एक इंसानी कमजोरी ने उसे एक ही झटके में मंत्री की कुर्सी से खींच कर सलाखों के पीछे पंहुचा दिया। आज हम आपको बताएंगे कि कौन-कौन थीं वो लड़कियां जो बनीं कांडा की कमजोरी और उसकी जिंदगी को नर्क में बदल दिया।
आगे स्लाइड के जरिए जानिए, गोपाल गोयल कांडा के जीवन में आई लडकियों की कहानी जिनमें से एक के सुसाइड नोट की वजह से आज वह जेल में है...