दो साल प्रतिबंध के बाद अंकुश भारद्वाज की गोल्डन वापसी

अम्बाला। शूटर अंकुश भारद्वाज ने गोल्डन वापसी की है। म्यूनिख (जर्मनी) में वल्र्ड चैंपियनशिप के दौरान अंकुश का डोप टेस्ट पॉजीटिव पाया गया था। इसके बाद उस दो साल का प्रतिबंध लगाया गया था। प्रतिबंध अवधि पूरी होने के बाद अंकुश ने हरियाणा स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लिया। दो गोल्ड और एक रजत पदक जीता। उसके बाद 32वीं नॉर्थ जोन चैंपियनशिप में भी दो रजत और एक कांस्य पदक जीता है।
अम्बाला के चुडिय़ाला गांव के अंकुश ने वर्ष 2008 में यूथ कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर धूम मचाई थी। उसने कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल जीते। उसका कॅरिअर ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा था कि डोप टेस्ट में प्रतिबंधित दवा का इस्तेमाल पाए जाने के कारण अंकुश पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था। प्रतिबंध पूरा होने के बाद अंकुश ने 3 से 7 अक्टूबर तक दिल्ली की डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में हुई हरियाणा स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लिया।
सीनियर वर्ग में अंकुश ने स्टैंडर्ड पिस्टल और सेंटर फायर में गोल्ड जीता जबकि एयर पिस्टल में रजत पदक प्राप्त किया। उसके बाद 9 से 14 अक्टूबर तक नई दिल्ली में हुई 32वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में रेपिड फायर और स्टैंडर्ड पिस्टल में रजत और सेंटर फायर में कांस्य पदक जीता। अब अंकुश दिसंबर में दिल्ली में होने वाली नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप की तैयारी में है।
बकौल लालचंद भारद्वाज (अंकुश के पिता) 'इन दो सालों में मेरे बेटे ने हिम्मत नहीं छोड़ी। वह लगातार प्रैक्टिस करता रहा। इस अवधि में घर भी कभी-कभार ही आया। हमें उम्मीद थी कि अंकुश अच्छी वापसी करेगा। हम अपने बेटे को फिर अंतरराष्ट्रीय बुलंदियों पर देखना चाहते हैं।Ó
अब दिसंबर में होने वाली नेशनल पर नजर
॥'मैंने एक-एक दिन गिनकर गुजारा है। मैं जानता हूं कि मैंने अपनी जिंदगी के दो बेहतरीन साल गवां दिए। लेकिन सबकुछ खत्म नहीं हुआ है। इन दो वर्षांे में मैंने कभी शूटिंग प्रैक्टिस नहीं छोड़ी। हर दिन मेरा हौंसला बढ़ता रहा है। मैंने ठान रखा है कि मैं एक दिन वह मुकाम जरूर हासिल करूंगा, जिसका मैं हकदार हूं। मेरी वापसी मेरी शुरुआत है और मेरी नजर दिसंबर में होने वाली नेशनल्स पर है।Ó
अंकुश भारद्वाज, इंटरनेशनल शूटर।
अभिषेक का भी गोल्डन प्रदर्शन
अम्बाला के घसीटपुर गांव के रहने वाले अभिषेक राणा ने भी हरियाणा स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप और 32वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्डन प्रदर्शन किया है। स्टेट शूटिंग में जूनियर वर्ग में स्पोट्र्स पिस्टल में स्वर्ण और एयर पिस्टल में रजत पदक जीता। नॉर्थ जोन चैंपियनशिप में अभिषेक स्टैंडर्ड, सेंटर फायर और स्पोट्र्स पिस्टल स्पर्धाओं में इकलौता प्रतिभागी था, बावजूद इसके उसे मेडल नहीं दिया गया। अभिषेक दिसंबर में होने वाली नेशनल्स की तैयारी कर रहा है। उसका कहना है कि वह अंकुश के साथ नई दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस करते हैं और इसी रेंज में नेशनल होगी, ऐसे में उन्हें होम फीलिंग का लाभ मिलेगा।
सरकार की बेरुखी, परिवार का ही सहारा
सरकार भले ही खेल और खिलाडिय़ों को बढ़ावा और करोड़ों के पुरस्कार देने का दम भरती है लेकिन इन दोनों इंटरनेशनल शूटरों को सरकार की तरफ से कोई आर्थिक सहायता या पुरस्कार नहीं मिला है। दोनों के परिवार ही इस खर्चीले खेल का बोझ वहन कर रहे हैं। यूथ कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने के बाद अंकुश को उम्मीदें थी कि सरकार पुरस्कार देगी। कई राज्यों में यूथ कॉमनवेल्थ के विजेताओं को सरकार ने पुरस्कार दिए लेकिन अंकुश की फाइल खेल विभाग की टेबलों पर ही भटकती रही। शूटिंग में इस्तेमाल होने वाली इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की एक आयातित गन की कीमत लाखों में होती है।







