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प्रदेश में 75 फीसदी लड़कियों में खून की कमी, सबला योजना पर सवाल

प्रमोद वशिष्ठ | Nov 27, 2012, 06:23AM IST

चंडीगढ़। देशभर में किशोरियों में व्याप्त कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2010 में शुरू की गई राजीव गांधी स्कीम फॉर एमपॉवरमेंट ऑफ एडोलिसेंट गर्ल्स (सबला) योजना पर प्रदेश में सवाल खड़े हो गए हैं। इस योजना में हरियाणा के 6 जिले शामिल किए गए थे जहां किशोरियों में खून की सबसे ज्यादा कमी थी। योजना के तहत इन जिलों में 11 से 14 साल की स्कूल नहीं जाने वाली और 14 से 18 साल तक की सभी तरह की करीब डेढ़ लाख बच्चियों को पौष्टिक आहार दिया जाना था लेकिन किसी जिले में बच्चियों को यह आहार नहीं मिल रहा।


 



सबला योजना में प्रदेश के छह जिलों अम्बाला, यमुनानगर, कैथल, रोहतक, रेवाड़ी और हिसार को शामिल किया गया था। स्वास्थ्य विभाग खुद प्रदेश में 75 फीसदी लड़कियों में खून की कमी की बात कबूल चुका है। सबला योजना का मकसद किशोरियों में व्याप्त कुपोषण की समस्या को खत्म करना और उनका समुचित विकास करना है लेकिन इसे सही ढंग से लागू न किए जाने के कारण पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा हो गया है।


वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं


 


ये है योजना
> 11 से 18 साल की किशोरियों को 600 कैलोरी वाला भोजन देना जिसमें 18-20 ग्राम प्रोटीन युक्त आहार होना चाहिए।
> एक साल में तीन सौ दिन पैक्ड आहार देना जरूरी।
> राज्य को प्रति माह 500 टन और साल में 6 हजार टन आहार देने का प्रावधान।
> योजना के मद में केंद्र और राज्य हर साल खर्च करते हैं दस-दस करोड़ रुपए।


कहां हुई चूक


किशोरियों को योजना के मानदंडो के अनुसार पोषण नहीं मिल रहा है। कुछ केन्द्रों पर दिखाने के लिए गेहूं और चावल (75-75 ग्राम्स) दिए जा रहे हैं। असल में अभी तक सबला के मानदंडों के हिसाब से 'ऊपरÓ से आहार आ ही नहीं रहा। आंगनबाड़ी केन्द्रों में 5 साल तक के बच्चों में दिया जा रहा भोजन ही 11-18 साल की बच्चियों को देकर औपचारिकता निभाई जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है।


जिम्मेदार कौन
आहार के वितरण की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय है। मंत्रालय को वितरण की पूरी रिपोर्ट हर साल देनी होती है। मंत्रालय के अफसरों ने कागजों में तो रिपोर्ट बना ली लेकिन जमीनी स्तर की खामियां दूर नहीं की।


किसने बदले नियम
विभाग की फाइल में केंद्र के मानदंडों की धज्जियां उडाई जा रही है। 2010 में ही तत्कालीन निदेशक ने पहली बार गेहूं और चावल देने के आदेश दिए थे। पैक्ड फूड के लिए अलग से कोई टेंडर नहीं मंगाया गया।


दूसरे प्रदेशों में पैक्ड फूड


यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक व तमिलनाडू में सरकारें योजना के तहत पैक्ड फूड देती हैं लेकिन हरियाणा में ऐसा नहीं हो पाया।


अम्बाला जिले में जमीनी हालत
केस 1 : अंबाला की बाल्मिकी बस्ती का आंगनबाड़ी केन्द्र। सेंटर कुम्हार मंडी। संचालिका लवली रानी कहती हैं, 'सबला के अंदर तीन साल में सिर्फ दो बार गेहूं और चावल मिले। हमारे पास जो बच्चियां आती हैं, उन्हें 0 से 5 साल के बच्चों के लिए बनने वाला आहार खिला देते हैं। इसी सेंटर पर रजिस्टर्ड 16 वर्षीय पायल कहती है कि केंद्र से मिलने वाले आहार को वह परिवार के साथ मिल-बांटकर खा लेती हैं। नियमानुसार यह गलत है। योजना के तहत सेंटर इंचार्ज को किशोरी को अपने सामने आहार खिलाना होता है।


केस २ : अम्बाला सिटी का सेंटर चैन मंडी। इसकी संचालिका हैं श्यामलता। इनके रजिस्टर में सबला योजना के तहत तीन लड़कियों के नाम दर्ज हैं। इनमें से 17 साल की रानी राकेश के घर पहुंचने पर देखा कि उसे भी 5 साल तक के बच्चों के लिए बना आहार दिया गया था। रानी ने बताया कि उन्हें अलग से आहार नहीं मिला। हां, रजिस्टर पर साइन जरूर करा लिए गए। अम्बाला कैंट की रहने वाली 16 साल की शिल्पा ने कहा कि उसे महीने में आधा किलो चावल और आधा किलो गेहूं ही दिया गया।


एक्सपर्ट व्यू : आधा पोषण भी नहीं
मात्र 150 ग्राम गेहूं और चावल से 600 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन नहीं मिल सकता। इससे तो 50 फीसदी पोषण भी नहीं मिलता। - डॉ. रवि इन्दर सिंह, डाइटीशियन, चंडीगढ़


और इधर... सरकार का दावा
महिला एवं बाल विकास मंत्री गीता भुक्कल का दावा है कि सबला के तहत प्रदेश में 11 से 18 साल की 2 लाख 7 हजार लड़कियां कवर की जाती हैं। इनके लिए चालू वित्त वर्ष में त्र 31.7 करोड़ आवंटित किए गए।


सीधी बात : महिला एवं बाल विकास मंत्री गीता भुक्कल
सवाल : हरियाणा में राजीव गांधी स्कीम फॉर एमपॉवरमेंट ऑफ एडोलिसेंट गल्र्स योजना कैसी चल रही है?
भुक्कल : योजना चल तो रही है लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं।
सवाल : योजना के तहत आहार पहुंच क्यों नहीं रहा है?
भुक्कल : हम अभी तक कोई व्यवस्था नहीं बना पाए हैं। गेहूं-चावल देने का प्रयास हमने एफसीआई के जरिये किए हैं।
सवाल : लेकिन गेहूं-चावल देने का तो कोई प्रावधान ही नहीं है?
भुक्कल : सही कहा, लेकिन हम आहार देने के प्रावधानों पर फिर से विचार करेंगे।
सवाल : डेढ़ लाख बच्चियों के आहार में घपला हो रहा है?
भुक्कल : हम इसकी जांच करेंगे लेकिन हमारा प्रयास रहेगा कि सभी बच्चियों को पर्याप्त पोषण मिले। हेराफेरी करने वाले निलंबित किए जाएंगे।

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