अब्बा! क्या हमें जेल ले जा रहे हैं, हैरान रह गए पिता

अम्बाला सिटी.अब्बा क्या हम जेल जा रहे हैं? चार वर्षीय सकीना जाफरी का यह सवाल सुनकर उसके अब्बा हैदर सैय्यद बिलाल हैरान हो गए। बिलाल ने हाथों में बंदूक थामे साथ खड़े पुलिस कर्मचारियों की ओर देखा और फिर पुराने लोहे के गेट को। समझ गए कि बच्ची के सवाल का मर्म क्या है। क्या जवाब देते..बस सकीना को गोद में उठाकर सीने से लगा लिया।
सकीना भी सदा-ए-सरहद बस में पाकिस्तान लौट रही थी। उसके सवाल ने कइयों को झकझोर दिया। जब-जब भारत और पाक में तनाव होता है। संबंध को सुधारने के लिए सबसे पहले सदा ए सरहद अमन का पैगाम लेकर चलती है।मंगलवार को इस बस के अगले पहिए के तीन नट टूटने पर अम्बाला में खड़ी हो गई। रोडवेज वर्कशाप में सायरन बजाती पुलिस की आधा दर्जन गाड़ियां पहुंची और बंदूकधारी पुलिस ने बस को सुरक्षा में ले लिया, तो बस में सफर करने वाले बच्चे सहम गए।
मुल्तान के शरीफ पार्क की रहने वाली चार वर्षीय सकीना जाफरी भी उनमें से एक थी। लघु शंका के लिए अपने अब्बा के साथ बस से बाहर निकली। बस से बाहर निकलते ही सुरक्षा की दृष्टि से चार पुलिस कर्मचारी संगीनों का साया लिए उनके साथ चल पड़े। मासूम सकीना को समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है।जैसे जैसे पुलिस कर्मचारी उन्हें अपनी सुरक्षा में रोडवेज कार्यालय लेकर जा रहे थे, वैसे ही सकीना के चेहरा जर्द होगा गया। पुलिस कर्मचारियों ने जैसे ही रोडवेज के लोहे के गेट को खोला, तभी सकीना ने सवाल पूछा, अब्बा क्या हमें जेल ले जा रहे हैं?
अब्बा बिलाल कुछ नहीं बोल सके और सीने से चिपका लिया। पिछले दिनों पाकिस्तान की जेल में बंद सुरजीत व सरबजीत मीडिया में सुर्खियों में रहे हैं। सकीना के जहन में भी उभरा सवाल शायद उसी से जुड़ा था। अब्बा से जवाब नहीं मिला, बस में बैठने के बाद भी सकीना बार-बार पर्दा हटाकर बाहर झांकती रही। उसके अब्बा बाहर न झांकने की ताकीद देते रहे। इस्लामाबाद जा रहे सात वर्षीय रेयान फैजल और उसका छोटा भाई चार वर्षीय सैवान फैजल भी बस में घुटन महसूस कर रहे थे और बाहर खुले में जाकर खेलना चाहते थे लेकिन उन पर भी बंदिश थी। चार घंटे बस में ही कटे।
दोनों मुल्कों में अमन हो
भारत से अपने रिश्तेदारों को मिलकर लौट रही 68 वर्षीय सुरैया बानो बुरके में थी, लेकिन मन के अरमान जुबां पर आ ही गए। बानो बेगम ने कहा कि यह बस अमन का पैगाम लेकर जाती है, खुदा से इल्तजा है कि सिर्फ पैगाम नहीं दोनों देशों में अमन दौड़े, फिर इस बस को संगीनों के साए की जरूरत न पड़े। वैरभाव तो सियासतदानों का खेल है, अवाम तो अमन चाहता है। साथ खड़ी फातिमा और लाहौर निवासी मोहम्मद खान के मुंह से निकला ‘आमीन’।








