अम्बाला. झज्जर.लिंगानुपात को लेकर पूरी दुनिया में बदनामी झेल रहा हरियाणा का जिला झज्जर अब बेटी बचाने के लिए नई तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए अल्ट्रासाउंड मशीनों पर निगरानी रखने के लिए साइलेंट ऑब्जर्वर से भी आगे निकलकर एडवांस एक्टिव ट्रैकर का प्रयोग किया जाएगा। इसी के साथ देशभर में झज्जर देश का पहला जिला होगा, जो इस एक्ट्रिक ट्रैकर तकनीक का प्रयोग करेगा। महाराष्ट्र मंे लिंग जांच पर अंकुश लगाने को प्रयोग हो रही तकनीक से एक कदम आगे की तकनीक हरियाणा मंे प्रयोग हो सकेगी।
अभी तक कोल्हापुर मंे सबसे बड़े प्रयोग के रूप में उभरकर आए साइलेंट ऑब्र्जवर को ही इस कार्य के लिए बेहतर माना जा रहा है। अब इस कड़ी मंे अपडेटेड वर्जन के तौर पर एडवांस टेक्नोलॉजी मंे सामने आए एक्टिव ट्रैकर के परिणाम और अधिक बेहतर मिले है।
महाराष्ट्र की पुणो स्थित मैगनम ऑपस कंपनी के इस सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ करना भी मुमकिन नहीं है। एडवांस एक्टिव ट्रैकर के जरिए छेड़छाड़ करने पर मशीन में लगी सिम एसएमएस के जरिए सिविल सर्जन को गड़बड़ी के बारे में सूचित कर देगी। इस सॉफ्टवेयर के जरिए अपने ऑफिस में बैठे अधिकारी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निगरानी रख सकेंगे।
एक्टिव ट्रैकर के जरिए ऑनलाइन भी निगरानी रखी जा सकेगी। फिर यह एक्टिव ट्रैकर जीपीएस और जीपीआरएस तकनीक पर काम करता है। एक्टिव ट्रैकर सोनोग्राफी मशीन से बाहरी तौर पर जुड़ा होगा और तकनीकी संकेत हेडक्वार्टर मंे भेजता रहेगा।
इसमें मरीज की निजता का कहीं भी उल्लंघन नहीं होगा। बता दें कि झज्जर में 1000 लड़कों पर 861 लड़कियों का अनुपात है। जिले के दो गांव तो सबसे ज्यादा लिंगानुपात के लिए बदनाम हैं। इनमें बहराणा गांव में एक हजार लड़कों पर 378 लड़कियां और इसी के साथ लगते गांव दिमाना में 444 लड़कियां प्रति हजार लड़कों पर है।
नहीं भरना होगा फार्म एफ
अल्ट्रासाउंड केंद्रों को अब फार्म एफ भरकर स्वास्थ्य विभाग को नहीं देना होगा। जिसमंे महीने भर के अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को भेजा जाता था। अब इस एक्ट्रिव ट्रैकर के जरिए ही पूरा डाटा भेजा जा सकेगा। वहीं इसका एक फायदा यह भी होगा कि एक बार एक मशीन पर मरीज की जांच होने के बाद यदि मरीज दूसरे केंद्र पर जाकर भी जांच कराता है तो मशीन उसकी केस हिस्ट्री की तुरंत जानकारी दे देगी।