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लापरवाह डाक्टर और बीमा कंपनी पर ढाई लाख रुपए जुर्माना ठोंका

 
Source: उज्ज्वल शर्मा   |   Last Updated 06:39(08/02/12)
 
 
 
 
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 अम्बाला सिटी.   लगभग साढ़े पांच साल पूर्व डाक्टर ने इलाज के दौरान लापरवाही बरती थी जिस कारण महिला की मौत हो गई थी। स्टेट कंज्यूमर डिसप्यूट र्रिडेसल कमिशन (एडिशनल बैंच) ने सिटी सिविल अस्पताल के डाक्टर अनिल जैन को दोषी मानते हुए उन्हें तथा उनका इलाज के दौरान बीमा करने वाली कंपनी को 2.50 लाख का जुर्माना किया है।


 



कालका के मल्लां गांव के देवेंद्र कुमार ने पत्नी उर्मिल की मौत के बाद जिला उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया था। वहां से केस डिसमिस होने के बाद देवेंद्र ने र्रिडेसल कमिशन में फोरम के फैसले को नवंबर 2011 में चुनौती दी थी। देवेंद्र ने शिकायत में कहा था कि उन्होंने अपनी पत्नी उर्मिल को 13 फरवरी 2006 को डा. अनिल जैन को दिखाया था। अनिल जैन ने उर्मिल को हर्निया बताया था। लगभग चाह माह बाद 15 जून को उर्मिल का ऑपरेशन किया था। उन्होंने कमिशन में एफिडेविट दिया था कि ऑपरेशन के लिए डा. जैन ने 3000 रुपए मांगे थे लेकिन उन्होंने डाक्टर को दो हजार रुपए दिए थे। 16 जून रात को 11 बजे के करीब उनकी पत्नी की मौत हो गई थी।


 


 उन्होंने इस मौत के लिए अम्बाला के कलेक्टर, डा. अनिल जैन, सिविल सर्जन, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी डिविजनल मैनेजर को पार्टी बनाया था।
कमिशन राहत दी कमिशन ने: देवेंद्र- देवेंद्र ने कहा कि र्रिडेसल कमिशन के फैसले से उन्हें काफी राहत मिली। उन्होंने कहा कि वे पहले ही कह रहे थे कि उनकी पत्नी की मौत की वजह डाक्टर की लापरवाही रही है। स्वास्थ्य विभाग ने उनकी बात नहीं सुनी थी। कमिशन ने उनकी शिकायत पर जो फैसला दिया है, वह बहुत बढ़िया है।



स्टेट कंज्यूमर डिसप्यूट र्रिडेसल कमिशन की सदस्य डा. रेखा शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि महिला उर्मिल की मौत डाक्टर की लापरवाही से हुई है क्योंकि डाक्टर अनिल जैन ने हर्निया के ऑपरेशन के दौरान काफी देरी बरती है। डाक्टर जैन ने महिला के शरीर में होने वाले बदलाव की तरफ ध्यान नहीं दिया। सिविल सर्जन ने जांच अधिकारी डा. विनोद गुप्ता की जांच रिपोर्ट व अन्य बयानों की कापियां शिकायतकर्ता को देने से मना कर दिया था।


 


कमिशन ने अपने आदेश में कहा कि जिला फोरम ने डाक्टर गुप्ता की जांच पर गौर न करते हुए केस डिसमिस कर दिया। कमिशन की निगाह में डाक्टर जैन व इलाज के दौरान डाक्टर जैन का बीमा करने वाली कंपनी दोषी है इसलिए कमिशन ने आदेश दिए कि डाक्टर जैन व बीमा कंपनी हर्जाने के तौर पर दो लाख तथा मानसिक उत्पीड़न झेलने की एवज में देवेंद्र कुमार को 50 हजार रुपए दिए जाएं। यह राशि 45 दिनों के अंदर देने के आदेश कमिशन ने दिए।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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