हरियाणा के नेता ही नहीं, पहलवान भी पहुंचे यूपी
Source: प्रमोद वशिष्ठ | Last Updated 02:52(06/02/12)
अम्बाला.चंडीगढ़. उत्तर प्रदेश (यूपी) की ‘महाभारत’ में हरियाणा के नेता ही नहीं, बल्कि पहलवानों की भागीदारी भी कम नहीं होती। दोनों राज्यों के अखाड़ों में माटी बदल रिश्ता है। यहां तक कि दिल्ली में तैयारी करने वाले पहलवानों के बीच ऐसा दोस्ताना है कि चुनावों में वे एक-दूसरे के राज्यों में अपने चेहते नेताओं के यहां आते हैं।
यूपी, पंजाब एवं हरियाणा में नेताओं को चुनावों में अपने इर्द-गिर्द अपने समर्थक पहलवान रखने का शौक है। कोई पहलवान यारी-बासी में जाता है तो कोई अपनी शर्तो के मुताबिक। चुनावों में कुछ अखाड़े तो खाली हो जाते हैं। एक तरह से ये बतौर अंगरक्षक एवं विश्वसनीय दोस्त का काम करते हैं। या ये कहें कि कनकटे पहलवान बॉडीगार्ड, बाउंसर से कहीं ज्यादा भूमिका निभाते हैं।
अगर एक अखाड़ा सूत्र की मानें तो यहां के सात सौ से ज्यादा पहलवान यूपी हैं, जिनमें ज्यादातर अपनी मर्जी से गए हैं। हालांकि ऐसे अखाड़े भी कम नहीं हैं, जिनके पहलवान राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेते। कुछ ऐसे हैं, जिनके पहलवान अखाड़े से नहीं अपनी मर्जी से जाते हैं। प्रसिद्ध जोगी वाला अखाड़ा के महंत वेदनाथ कहते हैं कि उनके अखाड़े से पहलवान चुनावों में चला जाए तो उसे अखाड़े से निकाल देते हैं। हालांकि लगभग सभी दलों के नेता उनके यहां आते हैं, लेकिन पहलवान मना कर देते हैं। वे कहते हैं कि राज्य के करीब दो सौ अखाड़ों से पहलवान जाते हैं।
अपने दबदबे वाले क्षेत्रों में यहां के नेता अपनी-अपनी पार्टियों के लिए कर रहे प्रचार
राहुल गांधी के मिशन 85 सीट के लिए भी यहां के बड़ी संख्या में युवा नेताओं की ड्यूटी लगी है। खासतौर से हरियाणा के जाट, अहीर एवं गुर्जर नेताओं का वहां दबदबा है। ये नेता भी पहलवान साथ लेकर जाते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की भूमि अधिग्रहण एवं खेल नीति पर वहां के नेताओं का भाषण केंद्रित हो रहा है। हरियाणा से सटे यूपी के क्षेत्रों में यहां की सरकार के विकास की तुलना नजर आती है।
हरियाणा में मुख्य रूप से जाट, अहीर एवं कुछ संख्या में गुर्जर नेता ही प्रभावी हैं। इनको हरियाणा से सटे क्षेत्रों में प्रचार के लिए बुलाया जाता है। ये वोट कितना बदल पाएंगे यह बात अलग है। इन नेताओं में कांग्रेस के सबसे ज्यादा हैं। इससे कम भाजपा के हैं। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कई क्षेत्रों में हवाई दौरे हैं। राष्ट्रीय किसान नेता के रूप में उन्हें वहां बुलाया गया है। सांसद दीपेंद्र हुड्डा की ड्यूटी राहुल के साथ है। राष्ट्रीय महासचिव बीरेंद्र सिंह एवं उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला को बड़ा क्षेत्र दिया गया है।
अहीर नेताओं में कांग्रेस से मुख्य संसदीय सचिव राव दानसिंह मेरठ में ताल ठोंक रहे हैं। उनको राहुल गांधी की रैलियों में जिम्मेदारी मिली। इसके बाद वे मैनपुरी सहित कई विधानसभाओं में जाएंगे। अहीर नेताओं में बिजली मंत्री कैप्टन अजय यादव की ड्यूटी लगी है। गुर्जर नेताओं में कांग्रेसी विधायक धर्मसिंह छौक्कर ने मोर्चा संभाला है।
सांसद अरविंद शर्मा को वहां प्रमुख क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ समय से सोनिया दरबार में अपना कद बढ़ाया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन अभिमन्यु जाट बाहुल्य इलाकों में उमा भारती के साथ जाएंगे। वे अन्य कई विधानसभा क्षेत्रों में दौरा कर चुके हैं। भाजपा के प्रदेश महासिचव वीर कुमार यादव भी अपनी टीम के साथ जुटे हैं।
बहरहाल, प्रभावी नेता एवं पहलवान अपने-अपने समर्थकों को कितना लाभ पहुंचाते हैं, ये चर्चाएं आजकल चौपालों पर है।