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खुफिया टीम बताएगी अफसरों की कोताही

प्रमोद वशिष्ठ | Jul 30, 2012, 05:10AM IST
 
 

चंडीगढ़. अब जिलास्तर पर तैनात प्रमुख अफसरों की कार्यनीति की पल-पल की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास रहेगी। राज्य में अब खुफिया टीम इन अफसरों पर नजर रखेगी। जनहित से जुड़े कार्यो में कोताही और किसी मुद्दे पर हालात अचानक बिगड़ जाने की सूरत में उस जिले के अफसरों की भूमिका की जांच सबसे पहले होगी।




इस जांच में दो पहलू अहम होंगे। पहला-अफसरों की कितनी कोताही रही। दूसरा-क्या अफसर पहले से अलर्ट रहते तो हालात को बिगड़ने से रोका जा सकता था? अगर जांच में किसी भी तरह की ढिलाई सामने आई तो सीधी कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक कह दिया है कि काम करने वाले को ईनाम और कोताही बरतने वालों को सजा मिलेगी। इस कड़ी में करीब 35 छोटे-बड़े अधिकारी निशाने पर हैं।




पिछले 10-12 दिनों में अफसरों की लापरवाही के चलते हुई कई बड़ी घटनाओं से सरकार की किरकिरी हुई और विपक्ष के हाथ मुद्दा लग गया। रेवाड़ी कांड में तो प्रमुख अधिकारी मौके पर ही नहीं पहुंचे। अगर प्रमुख अधिकारी अलर्ट रहते तो वहां पुलिस व ग्रामीणों के बीच टकराव टल सकता था। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों और माहौल बिगाड़ने वाले कर्मचारियों पर संबंधित जिला प्रशासन को नजर रखनी होगी।



मारुति प्रकरण के बाद सरकार ने बड़ा सबक लेते हुए उद्योग जगत को आश्वस्त किया है कि उनकी सुरक्षा का दायित्व सरकार का है। मारुति और रेवाड़ी कांड में खुफिया तंत्र भी फेल साबित हुआ। इससे भी सरकार में नाराजगी है। पुख्ता सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने अपनी टीम को जिलों में तैनात बड़े अफसरों की कार्यनीति पर नजर रखने के निर्देश दे दिए हैं।


मारुति और रेवाड़ी कांड के बाद जिस तरह हालात संभालने में मुख्यमंत्री को खुद जुटना पड़ा, उससे वह बेहद खफा हैं। रेवाड़ी कांड के बाद तो देर रात तक उन्हें खुद ही मोबाइल पर आंदोलनकारियों से वार्ता करनी पड़ी। इन घटनाओं में मुख्यमंत्री के साथ केवल उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला सक्रिय तौर पर खड़े नजर आए।



नहीं चेत रहे डीसी-एसपी

मुख्यमंत्री सभी जिलों के डीसी-एसपी को बार-बार चेता चुके हैं। एक मीटिंग में तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि किसी भी तरह की हिंसा के लिए ये अफसर सीधे जवाबदेह होंगे। इसके बावजूद अफसर सुधरने का नाम नहीं ले रहे।


खत्म नहीं हुआ है संकट

मारुति प्रकरण के बाद मानेसर और रेवाड़ी में हिंसा के बाद बेशक वहां शांति कायम हो गई है लेकिन हरियाणा सरकार के लिए संकट का दौर अभी तक खत्म नहीं हुआ है। रेवाड़ी में जहां चिंगारी सुलग रही है वहीं फतेहाबाद में परमाणु संयंत्र के मुद्दे पर कब क्या हो जाए, कहा नहीं जा सकता। फतेहाबाद में जिस तरह किसानों ने महापड़ाव डाल रखा है और जिस तरह विपक्षी दल इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं, उससे सरकार में उच्च स्तर पर माथापच्ची जारी है और वह किसी भी तरह वहां शांति बनाए रखना चाहती है।
 
 
 

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