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परमाणु संयंत्र बना राजनीति का अखाड़ा
प्रमोद वशिष्ठ | Jul 17, 2012, 03:13AM IST

आज यहां जन अदालत की सुनवाई पर गोरखपुर से लेकर चंडीगढ़ तक का ध्यान टिका है। कानून व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए सरकार ने पुख्ता प्रबंध के निर्देश दिए हैं। इतिहास में जाएं तो इस परमाणु ताप-घर लगाने की मांग मुख्यमंत्री रहते चौधरी भजनलाल व ताऊ देवीलाल भी कर चुके हैं।
भूपेन्द्र सिंह हुड्डा इस मुद्दे पर तीसरे मुख्यमंत्री हैं, जिनकी मांग पर यह योजना सिरे चढ़ती नजर आ रही है। विशेष बात यह है कि अब भजनलाल के पुत्र एवं हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई इसका डटकर विरोध कर रहे हैं। साथ ही इनेलो भी विरोध पर उतारू है।
इनेलो के प्रधान महासचिव अजय सिंह चौटाला ने तो यहां तक कहा है कि वे परमाणु संयंत्र नहीं लगने देंगे, इसके लिए भले ही उन्हें सीने पर गोली खानी पड़े। इधर, मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा इसे प्रदेश, क्षेत्र व जनहित का बड़ा मुद्दा बता रहे हैं। बिजली की कमी पूरी होने के साथ करीब 50 हजार रोजगार इसमें लगेंगे।
1984 में पूर्व सीएम भजनलाल ने उठाई थी मांग
भजनलाल ने मुख्यमंत्री रहते 20 जुलाई, 1984 को उस वक्तप्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को फतेहाबाद जिले में संयंत्र लगाने का पत्र लिखा।
इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल ने 25 अक्टूबर, 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को इन्हीं चार मुद्दों का हवाला देते हुए पुन: पत्र लिखा था।
23 नवम्बर, 1987 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पत्र लिखा। उन्होंने परमाणु संयंत्र के लिए कुम्हारिया को सबसे उपयुक्त स्थल बताया था और शीघ्र ही स्वीकृति प्रदान करने को कहा था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने 16 जुलाई, 1993 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव को तीसरी बार पत्र लिखकर फतेहाबाद में परमाणु संयंत्र लगाने का अनुरोध किया था।
अब वर्ष 2006 में तथा बाद में 2007 में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने दो बार इस मुद्दे को केन्द्र के समक्ष उठा कर यह संयंत्र स्थापित करने की मांग की।
गोरखपुर ही क्यों?
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री संपत की मानें तो पूर्व सीएम भजनलाल के लिखे पत्र में चार बिंदुओं पर जोर दिया था। इसमें कहा था कि यहां पर परमाणु संयंत्र लगाना सबसे उचित है। यह स्थान राजस्थान तथा पंजाब के निकट होने से दोनों राज्यों की बिजली आवश्यकता पूरी कर सकता है।
इस संयंत्र से भेजे जाने वाली बिजली के लिए अलग से अतिरिक्त खर्चा भी नहीं करना पड़ेगा। आवश्यकता के अनुसार सम्प्रेषण प्रणाली पहले ही उपलब्ध है, तीसरा यह स्थल अंतर्राष्ट्रीय सीमा से भी काफी दूरी पर है इसलिए यह सुरक्षित जगह है। पेशकश की जगह से किसी प्रकार की जनसंख्या को हटाना नहीं पड़ेगा।






