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आईपीएल के हीरो बिसला ने दस साल की उम्र में थामा था बल्ला
अमित धवन
| May 28, 2012, 07:14AM IST

शाहरुख की कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के विकेट कीपर कम ओपनिंग बैट्समैन मनविंद्र ने आईपीएल के फाइनल मुकाबले में आतिशी पारी खेली। 48 गेंदों में शानदार 89 रन बनाए। मैच के दौरान उनकी पत्नी अर्पिता चेन्नई के मैदान में मौजूद थीं जबकि उनके माता-पिता गुड़गांव में अपने घर पर टीवी देखकर बेटे की कामयाबी की तस्वीर देख रहे थे।
मैच के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में मनविंद्र की मां दयाकौर ने कहा कि बेटे ने परिवार का नाम रोशन कर दिया है। उन्हें उम्मीद थी कि वह आज अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा। मनविंद्र की चौके छक्कों की पारी को देख हिसारवासी भी काफी खुश हैं। कप जीतने के बाद कई लोगों ने डॉ. बिसला को फोन करके बेटे की कामयाबी पर बधाई दी।
चौथी से खेलना शुरू किया
मनविंद्र के पिता डॉ. बिसला खुद भी खिलाड़ी रह चुके हैं। वह वालीबॉल खेलते थे। भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि मनविंद्र को बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक था। वह चौथी क्लास में था, तब जवाहर नगर में अनुराग हुड्डा की क्रिकेट एकेडमी में क्रिकेट सीखना शुरू किया था। पिता ने बताया कि वैसे तो उन्हें बेटे पर यकीन था कि वह एक दिन क्रिकेट में अपना नाम रोशन करेगा। मगर एक बात यह भी सच है कि अगर वह दसवीं तक क्रिकेट में कामयाब न होता, तो वह उसे खेल छुड़वा कर पढ़ाई की तरफ ध्यान दिलाते। मनविंद्र ने दसवीं में होने के साथ ही वल्र्ड स्कूल टूर्नामेंट खेल लिया था।
तो क्रिकेट छोड़ देता मनविंद्र
पिता डॉ. बिसला ने बताया कि वर्ल्ड स्कूल टूर्नामेंट के लिए जब वह लुधियाना गए तो पहले 30 खिलाड़ियों में उनके बेटे का सलेक्शन नहीं हुआ था। जब वह वापस आने लगे तो एक बच्चे ने उन्हें रोककर जबरदस्ती वह वापस ले गए। उसके बाद कैंप में दो अतिरिक्त खिलाड़ी लिए गए। उसमें एक मनविंद्र था। बाद में वह टीम में शामिल हुआ और इंग्लैंड में बेहतरीन प्रदर्शन किया। यदि उस दिन वह बच्चा उन्हें नहीं रोकता तो शायद मनविंद्र क्रिकेट छोड़ देता।
पत्नी को जन्मदिन का तोहफा
कोलकाता नाइट राइडर्स की तरफ से धमाकेदार पारी खेलते हुए मनविंद्र ने अपनी पत्नी अर्पिता को जन्मदिन का तोहफा दिया। पांच साल पहले परिणय सूत्र में बंधी अर्पिता का रविवार को जन्मदिन था। वह अपने पति की शानदार पारी की गवाह बनी। अर्पिता गांव मय्यड़ की रहने वाली हैं और उनके पिता एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर के पद से रिटायर हुए हैं।
शहर से शुरू हुआ खेल का सफर
चौथी कक्षा में कैंपस स्कूल से व जवाहर नगर के अनुराग हुड्डा की अकेडमी से क्रिकेट खेलने की शुरुआत
सातवीं कक्षा में फरीदाबाद की गवर्नमेंट क्रिकेट अकेडमी में कोच राजकुमार के दिशा निर्देशन में क्रिकेट सीखा।
दसवीं कक्षा में इंग्लैंड में होने वाले वल्र्ड स्कूल टूर्नामेंट में चयनित।
2002 में हरियाणा की तरफ से रणजी ट्राफी खेली
2004 में देवधर ट्राफी खेली।
2004 से 2006 तक नॉर्थ जोन की तरफ से दलीप ट्राफी खेली।
न्यूजीलैंड में होने वाली इंडियन जूनियर वर्ल्ड कप में टीम के लिए खेला। तीन मैच में लगातार मैन ऑफ दा मैच रहा।
पांच साल तक लगातार हिमाचल की टीम में खेला।
2010 में आईपीएल में किंग इलेवन पंजाब की तरफ से खेला।
2011 से 2012 में कोलकाता नाइटराइडर्स टीम का हिस्सा।





