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लापरवाही के अंधेरे में गुम न हो जाएं माही जैसी जिंदगी
Bhaskar News
| Jun 25, 2012, 05:55AM IST

रात में ये दिखाई नहीं देते है। बारिश में ये मैन होल पानी में डूब जाते हैं। खुले मैन होल से जानलेवा घटनाएं भी हो चुकी हैं। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन आरके शर्मा ने भरोसा दिलाया है कि इन्हें चिह्ति कर ढक्कन लगवाए जाएंगे।
यहां-यहां मौत के कुएं
जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में सीवर लाइनों के बीच में मैन होल बनाए गए हैं। यह मैन होल खुले हैं या बंद हैं। इसकी जानकारी शायद विभाग को नहीं है। पिछले दिनों भास्कर ने प्री मानसून अभियान चलाकर प्रशासन को अलर्ट किया तो सीवर क्लीनिंग मशीन से सीवर लाइन साफ कराई गई। इसके बाद मैन होल खुले छोड़ दिए गए। यह नजारा कैंप चौक, मिल गेट रोड, शांति नगर, आजाद नगर, सब्जी मंडी आदि स्थान पर देखने को मिल सकता है।
अब लकड़ी के ढक्कन
शुरुआती तौर पर मैन होल के ढक्कन लोहे के लगाए जाते थे। इसके बाद आरसीसी के हो गए। अब सब्जी मंडी रोड पर हाल ही में लकड़ी के ढक्कन लगे हैं। ये किसी भारी वाहन का वजन सहने की स्थिति में नहीं है।
खुद ही किए इंतजाम
संबंधित विभाग ने जब इनकी अनदेखी की तो कुछ स्थानों पर लोगों ने आसपास से पत्थर उठाकर मैन होल पर रख दिए हैं। पड़ाव चौक पर रखा पत्थर इतना ऊंचा है कि कभी भी हादसा हो सकता है।
आजाद नगर में गिरे थे भाई-बहन
आजाद नगर गली नंबर चार में तो छह महीने के अंतराल में दो घटनाएं हो चुकी हैं। एक महीने पहले छोटे भाई बहन खुले मैन होल में गिर गए। उन्हें स्थानीय लोगों ने मशक्कत कर निकाला। इससे पांच महीने पहले भी बच्चे को किसी तरह सुरक्षित निकाला था। चार साल पहले मिर्जापुर रोड पर स्कूल से लौट रही एक मासूम बालिका खुले सीवर मैन होल में गिर गई और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।








