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‘ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट’ से बदलेगी गांवों की तस्वीर

सुनील बैनीवाल | Jun 25, 2012, 05:59AM IST
 
 

हिसार. ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट से गांवों की तस्वीर बदलने जा रही है। इससे न सिर्फ गांवों में हरियाली बढ़ेगी, बल्कि गांव में बुनियादी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाले दो से तीन लाख रुपयों से गावों में सड़कें, शौचालय और नलकूप आदि बनवाए जा सकेंगे।

किसानों की राय लेंगे

ग्रीन इंडिया प्रोजेक्ट बनाने का उद्देश्य किसानों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। इसके लिए किसानों को उनकी उपयोगिता के आधार पर पौधे दिए जाएंगे। किसानों से राय ली जाएगी कि उन्हें किन पौधों की दरकार है। इस प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार ने 46 हजार करोड़ की राशि निर्धारित की है। इसी राशि से हरियाणा सहित सभी राज्यों में नर्सरियां बनाई जाएंगी।

हर जिले में दो नर्सरियां

हरियाणा के प्रत्येक जिले में वन विभाग नर्सरियां लगाएगा। इन नर्सरियों को साथ लगते जिले की सीमा के नजदीक बनाया जाएगा।

इसका उद्देश्य है कि दो जिलों को नर्सरी की सुविधाएं मिल सकें। इसी प्रकार पूरे प्रदेश में इस प्रकार की नर्सरियों की स्थापना होगी। लेकिन एक खास बात यह है कि हर साल जिले की सीमा के दूसरे हिस्से पर इस प्रकार की नर्सरी का निर्माण किया जाएगा। भारत सरकार के आदेश हैं कि मार्च 2013 तक सभी नर्सरियों का काम पूरा हो जाना चाहिए। इसलिए इसका काम तेजी से चल रहा है।

इन नर्सरियों और किसानों को देने वाले पौधों की सारी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। वन विभाग दो साल तक किसानों के खेतों में लगे पौधों का ख्याल रखेगा। जिले के क्षेत्रफल के हिसाब से नर्सरियों की सीमा निर्धारित की जाएगी। प्रत्येक जिले में दो नर्सरियां लगाना तय हैं, चाहे उनका क्षेत्रफल कितना भी हो। परंतु बड़े जिलों में दो से ज्यादा नर्सरियां भी लगाई जा सकती हैं।

किसान ही बताएंगे कौन से पौधे चाहिए

प्रोजेक्ट की सबसे खासियत है कि इसका निर्माण किसानों को ध्यान में रख कर किया गया है।
हर गांव में किसानों की कमेटियां बनाई जाएंगी, जो किसानों से विचार विमर्श करेंगी कि उन्हें कौन-कौन से पौधों की जरूरत हैं।
हर गांव के लिए दो से तीन लाख रुपये का विशेष पैकेज होगा। इस राशि से गांवों में शौचालय, नलकूप, सड़कें और स्कूलों के लिए कमरे बनवाने का प्रावधान होगा। ऐसा उन्हीं गावों में होगा जहां पर इस तरह की कोई जरूरत होगी।
जमीन की टेस्टिंग होगी, उसी के आधार पर विभाग पौधे का चयन करेगा। इसमें किसानों के बताए गए पौधे भी शामिल होंगे।
 
 
 

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