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दिमाग में आया ऐसा विचार, जादू की कलम से हजारों साफ़
dainik bhaskar news
| Jun 25, 2012, 01:08AM IST

बाद में ठग ने अमाउंट भरी 85,500 रुपए और पैसे निकलवा लिए। यह तर्क पंजाब नेशनल बैंक का है। लेकिन कौन सा केमिकल इस्तेमाल हुआ होगा, इस पर कोई स्पष्ट नहीं। इस जादू की कलम के चक्कर में अब सब घनचक्कर बने हैं, पीड़ित, बैंक अधिकारी और पुलिस भी। लीड बैंक मैनेजर दिनेश भारद्वाज कहते हैं कि पिछले दिनों बैंक अधिकारियों की एक ट्रेनिंग वर्कशाप लगी थी।
उसमें सीबीआई की फोरेंसिक टीम ने डेमो भी दिखाया था जिसमें उन्होंने एक पेन से कुछ शब्द लिखे और तीन मिनट बाद ही वो शब्द गायब हो गए। भारद्वाज का कहना है कि इस केस में भी ऐसे ही किसी पेन का इस्तेमाल हुआ होगा। यह संभव है कि ठग ने उपभोक्ता को बातों में उलझा कर एकाउंट पेई और अमाउंट की रकम तो खास पेन से लिखवा ली जबकि साइन दूसरे पेन से करवाए। ऐसे में साइन छोड़कर बाकी शब्द वेनिश हो गए। दूसरी तरफ अनिल अरोड़ा कहते हैं कि उन्होंने लोन के लिए दो बैंकों में आवेदन किया था और हो सकता है वहीं से उनकी जानकारी लीक हुई हो जिसके बाद ठग ने उनसे संपर्क किया। इस मामले में बैंक की लापरवाही है और वो कोर्ट जाएंगे।
क्या है मामला : प्रभु प्रेम पुरम निवासी अनिल अरोड़ा को लोन की जरूरत थी। इसी दौरान राजेश नाम के युवक जिसको वो पहले नहीं जानते थे, ने सिटी बैंक पंचकूला से लोन दिलवाने की बात कही। राजेश ने फाइल पूरी करने के लिए जरूरी दस्तावेज के साथ 100 रुपए अमाउंट का एकाउंट पेई चेक मांगा। उन्होंने पीएनबी का 100 रुपए का चेक दे दिया। लेकिन कुछ दिन बाद जब उन्होंने बैंक जाकर खाता चेक किया तो पता चला कि उसमें से 85 हजार 500 रुपए गायब हैं।
बैंक की जवाबदेही क्या? : इस मामले में कानून बैंक कर्मी के पक्ष में है क्योंकि यह मामला बैंक की लापरवाही का नहीं बल्कि उपभोक्ता की लापरवाही का है। प्रावधान यह है कि 50 हजार रुपए से ऊपर के चेक को क्लियर करने से पहले बैंक कर्मचारी उस चेक को अल्ट्रा वायलेट लाइट में देखता है। उसके बाद वो सर्टिफाइड करता है। इस केस में नियम को फॉलो किया गया है लेकिन काम इतनी सफाई से हुआ कि पकड़ में नहीं आया।
...तब बच गया था उपभोक्ता : लोन दिलवाने के नाम पर ठगी का एक पहले भी होते-होते बचा था। ठग ने उपभोक्ता को फांसने के लिए पंजाब नेशनल बैंक के एक चेक की फोटोकॉपी भी दी और कहा कि वो लोन दिलवा देगा। उपभोक्ता ने समझदारी दिखाई और कहीं हस्ताक्षर करने के बजाय चेक की फोटोकॉपी लेकर पीएनबी की टिंबर मार्केट शाखा में पहुंच गया। वहां बैंक अधिकारियों ने चेक नंबर से पता लगाया तो यह राजस्थान स्थित पीएनबी शाखा का था।
चेक टेम्परिंग का केस भी हुआ : कुछ महीने पहले एसबीआई में भी चेक टेम्परिंग (छेड़छाड़) का मामला सामने आया था। तब एक बदमाश ने बैंक के ड्रॉप बाक्स से चेक निकाल कर उसमें टेम्परिंग के बाद कैश निकलवा ली थी। यह खेल कई दिनों बाद पकड़ में आया था।
क्या बरतें सावधानी : चेक में नाम और अमाउंट यदि प्रिंटेड हो (टाइप किया या कंप्यूटराइज्ड) तो बेहतर हो। हाथ से भी चेक भरें तो अमाउंट पर उस पर पारदर्शी सेलो टेप लगा दें क्योंकि सेलो टेप उतारकर टैंपर करना मुश्किल है।
अब ऐसे पकड़ में आ सकता है ठग
अनिल अरोड़ा राजेश कुमार नाम के उस व्यक्ति को पहले नहीं जानता था जिसे उसने लोन जारी करवाने के लिए 100 रुपए का एकाउंट पेई चेक दिया था। लेकिन बहुत संभावना है कि उस ठग का चेहरा पीएनबी की मॉडल टाउन शाखा के सीसी टीवी कैमरे में कैद हो गया हो। चेक क्लियर होने के समय के आसपास की फुटेज देखी जा सकती है। आमतौर पर बैंक 15 दिन की रिकार्डिग संभालकर रखते हैं। इस मामले में कैश व्रिडॉ 13 जून को हुआ है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि उनके पास रिकॉर्डिग है और पुलिस जांच अधिकारी की मांग पर पुलिस को फुटेज दे सकते हैं।
केमिकल रिएक्शन से ऐसा संभव
एसडी कालेज के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर जोगेंद्र का कहना है कि केमिकल रिएक्शन से ऐसा संभव हो सकता है। इस केस में कौन-सा केमिकल कितनी मात्रा में मिक्स किया होगा, कहना मुश्किल है। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि कलर रिएक्शन से ऐसा हुआ हो कि शब्द कुछ समय बाद वेनिश हो गए हों।
दूसरी तरफ जीएमएन कालेज के प्रोफेसर डा. वीके बिंदल कहते हैं कि उनके नॉलेज में ऐसी कोई इंक नहीं है जो कुछ देर बाद वेनिश हो जाती है। इतना जरूर है कि इंक रिमूवर (सोडियम थाई सल्फेट) से शब्द मिटाए गए हों लेकिन ऐसी स्थिति में कुछ निशान बचने चाहिए जो अल्ट्रा वायलेट लाइट में पकड़ में आ जाते हैं।






