हिसार. ओमपति रसोली के दर्द से परेशान है। इसी का ऑपरेशन कराने वह बुधवार को सिविल अस्पताल आई। यहां से उसे बगैर इलाज लौटना पड़ा। शहर के मिल गेट इलाके में रहने वाली 45 वर्षीय ओमपति के पास स्मार्ट कार्ड भी था। इसका लाभ उसे नहीं मिला। कारण था, कम्प्यूटर ने स्मार्ट कार्ड रिजेक्ट कर दिया।
कैमरी रोड इलाके में रहने वाले 70 वर्षीय धर्मचंद का स्मार्ट कार्ड भी सिविल अस्पताल के कम्प्यूटर ने नहीं स्वीकारा। ऐसे ही और भी रोगी हैं, जिनके स्मार्ट कार्ड कम्प्यूटर स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसे में मरीजों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के तहत नि:शुल्क इलाज नहीं मिल रहा है।
सरकार ने वर्ष 2012 से 13 के लिए आरएसबीवाई योजना के तहत न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से अनुबंध कर लिया है। अनुबंध कब से लागू होगा, यह तय नहीं हुआ है। फिलहाल लोगों की सुविधा के लिए पुरानी कंपनी से किए अनुबंध को बढ़ाने पर विचार चल रहा है। मार्च तक इस अनुबंध के तहत ही मरीजों को लाभ मिलने की संभावना है।
पुरानी कंपनी का अनुबंध बढ़ाने के बाद कम्प्यूटर का सॉफ्टवेयर अपडेट किया जाएगा। यह काम दो या तीन रोज बाद होने की संभावना है। सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद ही मरीजों को राहत मिलेगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सरकार बीपीएल कार्ड धारकों को स्मार्ट कार्ड जारी करती है। इससे परिवार एक साल में 30,000 रुपए तक नि:शुल्क उपचार ले सकता है। सरकारी अस्पतालों के अलावा अनुबंधित निजी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है।
34,657 स्मार्ट कार्ड धारक हैं जिले में
30,000 हजार रुपये तक मिलता है इलाज।
12 महीने में एक परिवार को मिलता है योजना का लाभ।
70 फीसदी मरीज निजी अस्पतालों में इलाज लेने को विवश।