गुड़गांव.मारुति सुजूकी के पीछे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे पुत्र स्वर्गीय संजय गांधी का सपना जुड़ा है। संजय गांधी का सपना था कि आम लोगों को सस्ती कार मिले।
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इसके लिए उन्होंने गुड़गांव को चुना। यहां कार बनाने का प्लांट स्थापित करने के लिए संजय ने वर्ष 1967-70 में प्रदेश के तत्कालीन सीएम बंशीलाल के सहयोग से नेशनल हाइवे-8 के साथ लगे क्षेत्र में लगभग 298 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया। अपने अथक प्रयास से संजय गांधी ने वर्ष 1976-77 में मारुति लिमिटेड के नाम से प्लांट स्थापित किया। वह यहां पर नियमित तौर पर बैठते थे और कार का उत्पादन कार्य देखते थे। कुछ ही दिन बाद वर्ष 1980 में विमान हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। वर्ष 1982 में भारत सरकार ने उनकी कंपनी अधिग्रहीत कर ली। कार बनाने के लिए जापान की कंपनी सुजूकी मोटर कॉरपोरेशन के साथ समझौता किया।
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1983 में संजय गांधी के जन्म दिन 14 दिसंबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हरपाल सिंह को पहली मारुति-800 कार की चाबी सौंपी। कुछ ही साल में मारुति कार आम लोगों के दिलों पर छा गई और गुड़गांव में औद्योगिक विकास शुरू हो गया। मारुति के गुड़गांव प्लांट में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में 15000 लोग जुड़ गए। कार के कलपुर्जे बनाने वाली लगभग 250 छोटी-बड़ी कंपनियां मारुति के साथ जुड़ीं। यहां औद्योगिक विकास को देख जापानी कंपनी होंडा मोटरसाइकिल स्कूटर इंडिया ने मानेसर में अपना पहला प्लांट स्थापित किया। गुड़गांव ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री का हब बन गया। यहां 2900 ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री स्थापित हो गईं, जिससे गुड़गांव की पहचान औद्योगिक नगरी के रूप में होने लगी।
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ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री की सफलता को देख बहुराष्ट्रीय आईटी-बीपीओ कंपनियों ने भी गुड़गांव का रुख किया, जिससे इसे मिलेनियम सिटी और साइबर सिटी की पहचान मिली। जमीन की कीमत भी आसमान छूने गली। रोजगार के लिए यहां बड़े पैमाने पर लोगों के आगमन को देख रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने यहां एक के बाद एक सोसायटी बसाईं।फिर होड़ लग गई।आज जिले की आबादी 15 लाख है।
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डिजायर की रही धूम
मारुति के दोनों प्लांटों में प्रतिदिन ढाई हजार कार का उत्पादन हो रहा है। वर्तमान में मारुति की डिजायर कार की मांग सबसे अधिक चल रही है। वर्ष 2011 की तुलना में चालू वर्ष के जून में डिजायर की बिक्री में 452.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। जून में लगभग 2900 करोड़ रुपए का अनुमानित कारोबार हुआ है। स्विफ्ट, एस्टिलो और रिट्ज सेगमेंट की कार की मांग में 39.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। दूसरी तरफ, ए-स्टार, ऑल्टो, वैगन-आर, एसएक्स-4 और किजाशि की बिक्री में कंपनी को निराशा हाथ लगी। जून में कुल 13066 कारों का निर्यात करके कंपनी ने 27.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।
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मानेसर का सफर
मारुति कार की भारी मांग को देख कंपनी ने वर्ष 2006 में आईएमटी मानेसर प्लांट में स्विफ्ट कार बनाने का काम शुरू किया। इसके लिए आईएमटी मानेसर में लगभग 800 एकड़ भूमि में प्लांट स्थापित किया गया, जिसके अंतर्गत कुल 3000 कर्मियों को रोजगार मिला, जिसमें 1900 कर्मी नियमित हैं। 700 कर्मी ट्रेनी के रूप में काम कर रहे हैं। प्लांट में लगभग 400 कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं।
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वर्ष 2011 में बिगड़ी स्थिति
पिछले वर्ष 58 दिनों की श्रमिक हड़ताल से कंपनी की उत्पादन गति थम गई थी। मानेसर प्लांट में जुलाई 2011 से लेकर अक्टूबर तक उत्पादन ठप रहा था। दिसंबर के बाद उत्पादन में सुधार दर्ज हुआ। बीते जून में मारुति कार की बिक्री में 20.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। जून में 96597 कार बेचकर कंपनी पूरी गति में आ गई। 1976-77 में मारुति लिमिटेड के नाम से प्लांट लगाया था, 1982 में सरकार ने जापानी कंपनी सुजूकी मोटर कॉरपोरेशन के साथ समझौता किया