विजेंद्र के गांव ने रात में देखा सपनों का मुकाबला

भिवानी.भिवानी-महम रोड स्थित पांच किलोमीटर दूर कालुवास गांव। रात करीब सवा तीन बजे। पूरा गांव जश्न में डूबा हुआ था। हो भी क्यों न, गांव के लाडले बॉक्सर विजेंद्र ने लंदन ओलिंपिक में अपनी पहली बाउट जीत पदक की ओर कदम जो बढ़ा लिए थे।
युवा झूम रहे थे तो बड़े-बुजुर्ग एक दूसरे को गले मिलकर बधाई दे रहे थे। मुकाबले में जब-जब विजेंद्र विरोधी को पंच लगा अंक बटोरता पूरा गांव तालियों से गूंज उठता। वहीं पिता महीपाल, भाई मनोज ने कहा कि आगे भी विजेंद्र इसी तरह जीतते हुए गोल्ड मेडल हासिल करेगा।
शनिवार रात करीब तीन बजे जैसे ही मुक्केबाज विजेंद्र के मुकाबले की घोषणा हुई तो लोग टीवी के आगे जम गए। लेकिन तभी बिजली गुल हो गई। लोग विजेंद्र के घर की ओर भागे। वहां विजेंद्र के भाई मनोज ने जनरेटर चलाया। पूरे गांव ने बैठकर विजेंद्र का मुकाबला देखा।
मैच फायनल होते ही बधाइयों का दौर शुरू हो गया। जश्न और बधाइयों का सिलसिला रविवार को दिनभर चला। वहीं हिसार में कैमरी रोड स्थिति जयभगवान के घर शाम होते ही आस पड़ोस के लोग एकत्र हो गए थे। उनके परिवार ने बड़ी टीवी स्क्रीन का बंदोबस्त किया था। शाम सात बजे जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ, सभी का ध्यान केंद्रित हो गया। जय का पंच जब प्रतिद्वंद्वी पर पड़ता, सभी खुशी से चिल्ला उठते। जय की जीत पर माहौल जश्न में बदल गया। हर कोई एक दूसरे को बधाई देने लगा।
आखिरी जीत भी मेरे जय की ही होगी: मंगेतर
जय की जीत से मैं बहुत-बहुत खुश हूं। दिन भर काफी नर्वस थी। कभी बीपी लो हो जाता तो कभी हाई हो जाता। अभी मुकाबला खत्म होने के बाद परिवार के साथ डिनर किया है। हमें पूरा विश्वास था कि जीत जय की ही होगी। मेरा मन था कि इस खुशी को जय से शेयर करती। पर उनसे बात न होने से बधाई नहीं दे पाई हूं। हमें पूरा यकीन है कि अंतिम जीत भी उन्हीं की होगी। -मीलू








