कम पढ़ाई के बावजूद इस किसान ने किया ऐसा अविष्कार कि इंजीनियर भी हुए हैरान

सोनीपत. इन्हें शिक्षा कोई बहुत ज्यादा नहीं मिली, लेकिन एक सोच थी कि दूसरों से कुछ अलग किया जाए। उसी सोच का ही परिणाम था कि आज वे ऐसे आविष्कार में लगे हैं, जो न केवल उनके लिए बल्कि समाज के लिए भी बढिय़ा उदाहरण बन चुके हैं।
फिर चाहे बात स्क्रैप से वाहन बनाने की हो या फिर आक्सीजन से वाहन चलाने की। यही नहीं सातवीं पास किसान द्वारा लीवर सिद्धांत पर काम कर कम बल को बढ़ाकर कई गुना करने के मॉडल को देख कई इंजीनियर भी हैरत में पड़ गए।
दीनबंधु सर छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकि विवि, मुरथल में गुरुवार को ऐसे ही 'वैज्ञानिकोंÓ का मेला देखने को मिला। प्रतिभागियों की इस मेहनत को देखने के लिए खुद तकनीकी शिक्षा विभाग की वित्तायुक्त धीरा खंडेलवाल पहुंची।
प्रतिभागियों की कला से उत्साहित होकर उन्होंने कह भी दिया कि अगले वर्ष से विशेष खोज एवं अविष्कार पर पुरस्कार मिलेंगे। उन्होंने अविष्कारकत्र्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसे अविष्कार पर कार्य करें जो न केवल समाज के लिए उपयोगी हो, अपितु वातावरण को शुद्ध रखने में मदद करते हों।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव आरके अरोड़ा, प्रो. राजकुमार, प्रो. राजिंदर कुमार सोनी, एचके अग्रवाल ने भी प्रतिभागियों का उत्सह थे।
विवि में अविष्कार परिषद का गठन
कुलपति एचएस चहल ने विवि ने भी एक केंद्र की स्थापना की है, जो औद्योगिक क्षेत्र के साथ मिलकर नई खोज एवं आविष्कारों पर कार्य कर रहा है। कुलपति ने कहा कि इस केंद्र को 25 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी गई है।
लीवर का सिद्धांत से बढ़ी ताकत : कैथल के सातवीं पास किसान ने लीवर के सिद्धांत से कम बल को बढ़ाकर कई गुणा करने के मॉडल कर्ण शक्ति ने सभी को हैरत में डाला। वहीं विश्वविद्यालय के छात्रों ने सोलर से चलने वाली रिक्शा,गोबर के उपले बनाने वाली मशीन तथा वृक्ष के पत्तों को खाद में बदलने वाली मशीन बनाई है।
कहीं भी चलेगा वाहन : विश्वविद्यालय के छात्र रजत सेठी की टीम ने ऑल टैरेन वाहन बनाया है। इस वाहन की विशेषता यह है कि यह मिट्टी, रेगिस्तान, कीचड़ व ऊबड़ -खाबड़ जमीन पर अच्छी तरह से चल सकता है।







