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जो जीवन भर दूसरों पर अत्याचार करता रहा वह आज कितना लाचार, दुखी और बीमार है। यह दृश्य औरंगजेब की आखिरी रात नाटक का है जो रविवार को जिंदल इंडस्ट्रीज स्थित शिव ओम ऑडिटोरियम में जीवंत हुआ।