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भूमि अधिग्रहण : किसान फिर हुए एकजुट, रेवाड़ी में महापंचायत आज

भास्कर न्यूज | Dec 09, 2012, 04:58AM IST
रेवाड़ी .  भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुई दो खूनी हिंसाओं के बाद गठित इकबाल चौधरी आयोग की चल रही कार्रवाई के बीच किसान एक बार फिर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। 9 दिसंबर को आसलवास आश्रम में उन्हीं 21 गांवों की महापंचायत बुलाई गई है, जिनकी जमीन को अधिग्रहण किया जाना था। 
 
इस महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत समेत अनेक किसान संगठनों  व राजनीतिक दलों के नेताओं की पहुंचने की संभावना है। आसलवास भी वहीं स्थान है, जहां पर 22 जुलाई को पुलिस प्रशासन व किसानों के बीच खूनी हिंसा हुई थी। इससे पहले 16 जुलाई को जिला सचिवालय पर भी किसानों व पुलिस कर्मचारियों के बीच हिंसा हो चुकी थी। उधर, महापंचायत को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। 
 
किसानों का आरोप, धोखा कर रही सरकार  
 
 किसानों का कहना है कि वे  एक साल से जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनरत है। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों के साथ जिला व पुलिस प्रशासन सीधा टकराव कर चुका है, जिसके चलते 16 जुलाई व 22 जुलाई को खूनी हिंसा हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार से किसान संघर्ष समिति की वार्ताएं हुईं, जिसमें तय हुआ था कि इन घटनाओं की जांच  जस्टिस इकबाल चौधरी आयोग करेगा। 
 
सरकार और किसानों की तरह से संयुक्त कमेटी का गठन भी किया गया। सरकार ने भरोसा दिलाया कि इस दौरान किसानों को जमीन को लेकर कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद सरकार आयोग की आड़ में उनके साथ धोखा कर रही है। जमीन को चोरी छिपे हड़पे जाने की साजिश है। इसलिए सेक्शन 4,6 के बाद भी कार्रवाई जारी है। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। इसलिए किसानों ने आर पार लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। 
 
15 हजार से ज्यादा किसान पहुंचेंगे महापंचायत में : किसान संघर्ष समिति के सदस्य रामकिशन महलावत, कामरेड राजेंद्र सिंह, अजय यादव का कहना है कि महापंचायत में किसान संगठनों के नेताओं के अलावा सामाजिक व राजनीतिक संगठन के सीनियर पदाधिकारी व नेता पहुंचेंगे। 15 हजार से ज्यादा किसान पंचायत में शिरकत करेंगे।
 
पंचायत पूरी तरह से शांतिपूर्वक ढंग से होगी। 500 स्वयंसेवकों की ड्यूटियां लगाई गई है। उन्होंने कहा कि एकसुर से व सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया जाएगा कि किसान किसी भी सूरत में अपनी एक इंच जमीन नहीं देंगे। 
 
 
400 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा संघर्ष 
 
 
जिले में 21 गांवों के किसानों की कुल 4100 एकड़  जमीन अधिग्रहण को लेकर नो िटस जारी किए हुए हैं।  इनमें बावल तहसील के आसलवास, पातुहेड़ा, खेडा मुरार, बावल, बनीपुर, मंगलेश्वर, ड्योढई, गढ़ी, बोलनी, बगथला, कसौला, कसौली, बखापुर, लोधाना, पीथनवास, इब्राहिमपुर के अलावा रेवाड़ी तहसील के झांझनवास, पिवड़ा, कालाका, मांढैया व कौनसीवास गांव  शामिल है। रेवाड़ी तहसील के गांवों की 400 एकड़  जमीन हुडा द्वारा सेक्टर विकसित के लिए अधिग्रहण की जानी थी। बावल के 16 गांवों की 3700 एकड़ जमीन  एचएसआईडीसी ने औद्योगिक विकास के तौर पर अधिग्रहण करनी थी।
 
सरकार ने भरोसा तोड़ा तो किसानों का गुस्सा उबाल खाने लगा  
 
अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत  सेक्शन 4  व छह के  नोटिस जारी किए। नोटिस 4 के खिलाफ अधिकांश किसान आपत्ति इसलिए दर्ज नहीं करा पाए, क्योंकि नोटिस के चार दिन बाद ही मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भरोसा दिलाया था  कि केंद्र की नई जमीन अधिग्रहण नीति नहंी आने तक जमीन अधिग्रहण नहीं करेंगे। बाद में नोटिस मिलने पर गुस्साए  किसान सड़कों पर उतर आए। 16 जुलाई को जिला सचिवालय व 22 जुलाई को गांव आसलवास में खूनी संघर्ष हुआ। सैकड़ों ग्रामीण व पुलिस कर्मचारी घायल हो गए। किसानों के मुताबिक राज्य  सरकार करीब 25 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन का मूल्य दे रही थी जबकि बाजार भाव हाइवे पर लगती जमीन का करीब दो करोड़ रुपए प्रति एकड़ व अंदर सीमा की जमीन के भाव एक करोड़ रुपए प्रति एकड़ आम है।
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