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PICS: महाभारत की 10 'गुप्त' बातें जो सिर्फ चंद लोगों को हैं पता!

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धर्म की कोई एक परिभाषा नहीं: तमाम लोगों को लगता होगा कि महाभारत धर्म का पाठ सिखाती है। कुछ लोग महाभारत को सत्य और असत्य से भी जोड़ते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। मौलिक महाभारत में ऐसा कोई प्रसंग नहीं आता, जिसमें सही और गलत की सटीक परिभाषा दी गई हो। 
 
दरअसल, सही और गलत परिप्रेक्ष्य तथा परिस्थिति के हिसाब से बदलता है। जैसे कि एक ही परिस्थिति में भीष्म और अजरुन ने अलग-अलग निर्णय लिए और दोनों को सही माना गया। भीष्म ने अंबा से विवाह करने से मना कर दिया क्योंकि उन्होंने अपने पिता के समक्ष जीवन पर्यन्त ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने की प्रतिज्ञा ली थी।
 
उनके लिए ब्रह्मचर्य व्रत का पालन ही सही था। अजरुन के सामने ऐसी ही परिस्थिति आई, जब उलुपी ने उनसे विवाह करने की इच्छा जाहिर की और प्रस्ताव अस्वीकार होने पर आत्महत्या करने की बात कह डाली। अजरुन भी उस समय ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रहे थे, लेकिन उनके लिए उलुपी का जीवन ज्यादा महत्वपूर्ण था। इसीलिए, अजरुन ने उसकी रक्षा करने को प्राथमिकता दी और ब्रह्मचर्य व्रत तोड़ने के अपने निर्णय को सही ठहराया।
 
महाभारत में सही और गलत का ऐसा ही एक और प्रसंग आता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि द्रोणाचार्य ने न्याय नहीं किया जब उन्होंने एकलव्य से अंगूठा मांगकर, अजरुन को आगे किया। यह पूरा सच नहीं है। महाभारत के अनुसार, एक बार तालाब में स्नान करते समय जब मगरमच्छ ने द्रोणाचार्य को जकड़ लिया था, तब अजरुन ने उनकी जान बचाई थी। उसी समय द्रोणाचार्य ने अजरुन को वचन दिया था कि वह उसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ योद्धा बनाएंगे।
 
अजरुन को दिए गए इस वचन को निभाने के लिए ही उन्होंने गुरु-दक्षिणा के तौर पर एकलव्य से अंगूठा मांगा। इससे स्पष्ट है कि सही और गलत की कोई सटीक परिभाषा नहीं गढ़ी जा सकती।

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