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बारिश-बर्फबारी ने बढ़ाई सर्दी, रोहतक-कुरुक्षेत्र में 3 एमएम बरसात

सुशील भार्गव | Dec 12, 2012, 04:12AM IST
 
 

करनाल.  पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानों में बारिश के चलते ठंड के अचानक पर निकल आए। मंगलवार को मौसम के करवट बदलने से समूचा उत्तर भारत ठंड की चपेट में आ गया है।
 
हरियाणा के कई हिस्सों में हल्की बारिश व बूंदाबांदी हुई। रोहतक व कुरुक्षेत्र में तीन एमएम बारिश हुई। प्रदेश के अन्य हिस्सों रेवाड़ी, हिसार, सिरसा, भिवानी, सोनीपत, पानीपत, करनाल, जींद, कैथल, अम्बाला और यमुनानगर में बूंदाबांदी हुई। 
 
धुंध अभी सप्ताह बाद: जब तक आसमान में बादल छाए रहेंगे, तब तक धुंध के गहराने के आसार कम ही हैं। हां, बादलों के छंटने के बाद यदि नमी बढ़ती चली गई तो धुंध का कहर शुरू हो सकता है।
 
पश्चिमी विक्षोभ से बदलाव: आईएमडी दिल्ली के पूर्व निदेशक चतर सिंह मलिक के अनुसार मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (डब्ल्यू डी) के कारण आया है। यह अंटलांटिक व भूमध्य सागर में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र होता है। पूरब की ओर बढ़कर पश्चिमी विक्षोभ भारत व पाकिस्तान जैसे देशों में बारिश व बर्फबारी की वजह बनता है। 
 
आगे क्या : आज कुछ राहत, फिर तीन दिन आफत
 
 
बुधवार को धूप निकलने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन 13, 14, 15 दिसंबर को मौसम फिर अंगडाई ले सकता है। इन दिनों में बूंदाबांदी-बारिश के प्रबल आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 15 के बाद दो-तीन दिन की राहत मिल सकती है। क्योंकि पाकिस्तान के रास्ते पश्चिमी विक्षोभ का प्रवाह जारी है। जब मैदानों से बादल छंट जाएंगे तो यहां शीतलहर शुरू हो जाएगी। यानी बारिश का दौर खत्म होते ही पाला जमने की बारी आ जाएगी।
 
 
6 डिग्री तक लुढ़क गया पारा
 
प्रदेश में अधिकतम तापमान जहां 24 घंटे पहले औसतन 25.4 डिग्री था, बारिश के बाद वह छह डिग्री तक घट गया। न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री तक कमी दर्ज की गई। पुरवाई की गति 4 से बढ़कर 13 किमी प्रति घंटा हो गई। ठंड बढ़ाने में तेज हवा की अहम भूमिका रही।
 
रबी फसलों के लिए फायदेमंद
 
 
मौसम का मिजाज बदलने से आम लोगों को भले दिक्कत पेश आए लेकिन किसानों के चेहरे खिल गए हैं। इस बारिश से रबी फसलों खासकर गेहूं को बहुत लाभ मिलेगा। ठंड बढ़ने और मौसम में पर्याप्त नमी रहने से गेहूं का फुटाव अच्छा होगा। इससे उत्पादन भी बढ़ेगा।
 
 
 
हरियाणा के टमाटर उत्पादक भी खुश
 
पाला जमना जितना लेट होता जा रहा है, टमाटर उत्पादक उतने ही खुश नजर आ रहे हैं। हालांकि, किसानों ने अभी से पाले से फसल को बचाने के इंतजाम तो कर लिए हैं, लेकिन जिस तरह से बरसात हो रही है, इससे किसान खासे खुश हैं क्योंकि इससे पाला देरी से जमेगा और टमाटर की फसल खराब नहीं होगी।
 
 

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