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राज्य सरकार आज बढ़ा सकती है बस किराया बढ़ेगा
हरीश मानव
| Feb 20, 2013, 06:49AM IST
चंडीगढ़ . बसों का किराया दो साल के अंतराल पर बढ़ाने वाली हरियाणा सरकार अब दो महीने के बाद ही बढ़ाने की जुगत में है।
हरियाणा रोडवेज के रिटेल में सस्ता डीजल खरीदने की बजाय बतौर बल्क कंज्यूमर 10.81 रुपए प्रति लीटर महंगा डीजल खरीदने का खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ेगा। रोडवेज ने राज्य सरकार से बसों के किराए में 25 फीसदी बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
20 फरवरी को होने वाली हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में बसों के किराए में प्रस्तावित वृद्धि को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। वर्तमान में हरियाणा रोडवेज की बसों का किराया 75 पैसे (पैसेंजर टैक्स लगाकर) प्रति किलोमीटर है। 25 फीसदी वृद्धि लागू होती है तो यह एक रुपया प्रति किलोमीटर हो सकता है।
12 दिसंबर 2012 को हरियाणा में रोडवेज बसों के किराए में 20 फीसदी की वृद्धि करते हुए इसे 50 पैसे प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 60 पैसे प्रतिकिलोमीटर किया गया था। 60 पैसे प्रति किलोमीटर पर 25 फीसदी पैसेंजर टैक्स लगाकर यह वर्तमान में 75 पैसे किलोमीटर है।
पिछले माह से दो कीमतें
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जनवरी 2013 में डीजल की दोहरी कीमतें लागू कर रिटेल में डीजल खरीदने के बजाय बतौर बल्क कंज्यूमर 10.81 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया था। ऐसे में, पंजाब रोडवेज ने कंज्यूमर तेल कंपनियों से महंगा डीजल खरीद बंद कर प्राइवेट पेट्रोल पंपों से सस्ते डीजल की खरीद शुरू की है। वहीं, कांग्रेस शासित राज्य होने के नाते हरियाणा रोडवेज अभी भी तेल कंपनियों से कंज्यूमर वर्ग का महंगा डीजल खरीद रहा है।
1 मार्च पेश हो सकता है बजट
हरियाणा विधान सभा का बजट सत्र 8 मार्च तक चलने की संभावना है। बजट 1 मार्च को पेश होने की संभावना है। 22 फरवरी से आरंभ हो रहे सत्र की अवधि वैसे तो बिजनेस एडवाइजरी कमेटी 22 को तय करेगी। सूत्रों के मुताबिक इस बजट में सरकार पहली बार खर्चो में 25 से 30 फीसदी कटौती करने जा रही है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य को छोड़कर परिवहन, लोक निर्माण आदि का बजट घट सकता है। इसके पीछे राज्य पर बढ़ता कर्ज माना जा रहा है।
कैबिनेट की बैठक आज
हरियाणा मंत्रिमंडल की 20 को होने वाली बैठक में आबकारी नीति पर मोहर लग सकती है। आवास पॉलिसी भी लाई जाएगी। मकान बनाने के लिए नीति गांव और शहर दोनों के लिए होगी। गांवों में 100-100 गज के प्लाटों पर ये मकान बनेंगे, जबकि शहरों में जमीन की तलाश होगी। इसमें दो साल का वक्तलग सकता है। मंत्रिमंडल में पेश होने के बाद ये पॉलिसी विधेयक के रूप में सदन में पेश की जाएगी।








