सोनिया-संजीव की अर्जी पर फैसला जल्द

हिसार। राष्ट्रपति महोदया, यहां जेल में मैं तिल तिलकर मर रही हूं। एक एक पल भारी हो गया है मेरे लिए जीना।कृपया मेरी जिंदगी पर फैसला करें...ये लाइनें हैं उस पत्र की जो सोनिया ने जेल से राष्ट्रपति (प्रतिभा पाटील) को वर्ष 2009 में लिखा। राष्ट्रपति ने इस पर संजीव व सोनिया को फांसी देने की याचिका को गृह मंत्रालय के पास कमेंट के लिए भेज दिया।तब गृहमंत्री थे पी चिदंबरम।17 फरवरी 2009 को गृह मंत्री ने सोनिया व संजीव की दया याचिका फाइल पर लिखा-बी रिजेक्टेड।
फाइल वापस महामहिम को भेज दी गई और अब बस महामहिम को इस पर फैसला करना है और गृहमंत्रालय उनके आदेशों पर अमल करवाएगा। संजीव व सोनिया इस वक्त अंबाला जेल में बंद हैं।इन दोनों सहित कई अन्य कुख्यात आतंकियों पर 24 अक्टूबर 2008 को जेल में सुरंग खोदने का भी मुकदमा दर्ज किया गया।यह मुकदमा अब कोर्ट में चल रहा है।
हिसार और अंबाला में फांसीघर
संजीव व सोनिया को अगर राष्ट्रपति माफ नहीं करते हैं तो इस सूरत में उनकी फांसी हिसार या अंबाला जेल में भी संभव है। दोनों ही जगह फांसीघर बने हुए हैं। रेलूराम पूनिया के भाई रामसिंह के वकील लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि राष्ट्रपति उन्हें इंकार करते हैं तो हिसार के न्यायिक क्षेत्र में यह मामला होने के चलते ज्यादा संभावनाएं इसी बात की हैं कि उन्हें हिसार जेल में ही फांसी दी जाएगी।
संजीव सोनिया के गुनाहों का सफरनामा
- 23 अगस्त 2001: सोनिया ने अपने पति संजीव के साथ मिलकर अपने पिता रेलूराम, उनकी पत्नी कृष्णा, पुत्री प्रियंका, पुत्र सुनील व शकुंतला सहित दो महीने की प्रीति की रात को हत्या कर दी।
- 31 मई 2004: हिसार के सेशन जज अरविंद कुमार गोयल की अदालत ने संजीव व सोनिया को सजा ए मौत की सजा सुनाई।
- 12 अप्रैल 2005: हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
- 15 फरवरी 2007: सुप्रीम कोर्ट ने सेशन जज के फैसले को बरकरार रखते हुए संजीव व सोनिया की फांसी की सजा को ज्यों का त्यों रखा।
- 23 अगस्त 2007: सुप्रीम कोर्ट ने संजीव व सोनिया की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया।
- 1 सितंबर 2007: सेशन जज एसएस लांबा की कोर्ट ने संजीव व सोनिया को फांसी की सजा के लिए 26 नवंबर 2007 का दिन मुकर्रर किया।इसी बीच संजीव व सोनिया ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेज दी और तब से महामहिम के फैसले का इंतजार है।








