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PHOTOS : हर ओर चीख पुकार आंखों में दहशत, अटकी हैं लोगों की सांसें

प्रवीन कौशिक | Dec 12, 2012, 02:24AM IST
PHOTOS : हर ओर चीख पुकार आंखों में दहशत, अटकी हैं लोगों की सांसें
फरीदाबाद.  स्कूल की निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने के बाद सैकड़ों परिवारों की जान सांसत में हैं। घटनास्थल के आसपास स्थित करीब आधा दर्जन टावरों को आनन-फानन में खाली करा लिया गया।
 
दरअसल, पूरे एरिया में बेसमेंट इंटरकनेक्ट हैं। बिल्डिंग गिरने के कारण कुछ दूर तक जमीन में दरारें भी पड़ गईं। अब इन लोगों की सांसें अटकी हैं।
 
आंखों में खौफ है। कई लोग तो डरते-डरते फिर से टावर में दाखिल हो गए तो कुछ लोगों ने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है।
 
खाली कराए गए टॉवर  
 
स्कूल की बिल्डिंग तेज धमाके के साथ गिरी। धमाके की आवाज आसपास के लोगों ने सुनी तो टावर से बाहर निकल आए।बिल्डिंग का मलबा देख कलेजा मुंह को आ गया ।हर ओर बस चीख-पुकार ही सुनाई दे रही थी। इन लोगों ने ही पुलिस को फोन किया। जो टावर के अंदर से उन्हें भी फोन करके बाहर निकलने को कहा गया।
 
घटना के बाद जब रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था, इसी बीच पास के एक टावर के झुकने की सूचना से हड़कंप मच गया। ऑपरेशन में लगे जवानों में भगदड़ मच गई।बाद में अधिकारियों के समझाने के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ।घटनास्थल के आसपास भी काफी बड़ी और चौड़ी दरार पड़ गई।
 
लगा कि भूकंप आ गया  
 
पड़ोस के एक टावर में रहने वाले विशाल ने बताया कि बिल्डिंग गिरने के बाद ऐसा लगा कि जैसे भूकंप आ गया हो। प्रशांत ने बताया कि घटना की जानकारी उसने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम व फायर ब्रिगेड को दी। ब्लॉक सी में रहने वाली निशा का कहना है कि उनके फ्लैट के सामने ही यह हादसा हुआ। उस समय वे घर पर काम कर रही थीं। तेज आवाज से वे सहम गईं।
 
मौत को दी मात
 
मूल रूप से गोरखपुर यूपी व हाल में सेक्टर-88 में रहने वाले मजदूर रमेश का कहना है कि वे स्कूल की बेसमेंट में उस समय बिजली के कनेक्शन के लिए घूम रहे थे। ऊपर अन्य मजदूर काम पर लगे थे। तभी अचानक बिल्डिंग धंसने लगी और वे नीचे फंस गए। बेसमेंट का लेंटर पिलरों से निकल रहे सरियों पर आकर लटक गया। उनको लगा कि अब उनकी जान ही जाएगी। शोर मचाया, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। वे इधर-उधर भागने लगे और दूसरी इमारत की बेसमेंट से ऊपर निकलकर आए। 
 
बेसमेंट में रहता है पानी
 
ब्लॉक-सी में रहने वाले गगन ने बताया कि बिल्डर बिल्डिंग बनाने में ही नहीं, बल्कि इसके बाद भी काफी लापरवाही बरतते हैं। यहां गगनचुंबी लगभग सभी इमारतों के नीचे बेसमेंट हैं। सभी बेसमेंट एक-दूसरे से कनेक्ट हैं। अधिकतर बेसमेंट में पानी भरा रहता है। पानी की सीलन के कारण बेसमेंट की नींव खराब होती है। इसलिए बड़ी इमारतों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। 
 
कमजोर पिलर ..
 
प्रशासन को प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जहां बिल्डिंग बनाई जा रही थी, वहां पहले पार्क बना हुआ था। इसके नीचे बेसमेंट था। पार्क के हिसाब से ही बेसमेंट के पिलर हल्के थे।कुछ महीनों पहले ही पार्क की जगह स्कूल की इमारत बनाने की योजना तैयार कर ली गई, लेकिन बेसमेंट के कमजोर पिलर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इन्हीं पिलर पर तीन मंजिला स्कूल की इमारत खड़ी कर दी गई। प्रशासन की जांच में इन तथ्यों के अलावा यह भी है कि कहीं धंसी इमारत की वजह इसकी नींव में कोई तकनीकी कमी तो नहीं थी।
 
पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग  
 
हजकां ने नहरपार सेक्टर-88 स्थित निर्माणाधीन इमारत गिरने से मृत लोगों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा व दोषी ठेकेदार व कंस्ट्रक्शन करने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। हजकां जिलाध्यक्ष डॉ. तेजपाल शर्मा ने कहा कि जिले में आए दिन इमारतें गिरने के हादसे हो रहे हैं।
 
जिला प्रशासन को ऐसी इमारतें बनने से पहले ही इस बात की पूरी तरह से जांच करनी चाहिए कि इमारत में प्रयुक्त होने वाला मेटेरियल किस स्तर का है। उन्होंने कहा इस हादसे में मारे गए लोगों को जिला प्रशासन व सरकार द्वारा पूरी राहत प्रदान की जाए, अन्यथा हजकां सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।
 
17 दिन -3 हादसे 
 
> 11 दिसंबर 2012 : सेक्टर-88 में स्कूल की निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने से तीन की मौत, आठ घायल।
> 10 दिसंबर 2012 : पाली क्रेशर जोन में एक क्रेशर जोन का फाउंडेशन तैयार करते समय दीवार गिर गई। चार मजदूरों की मौत हो गई, दस घायल।
> 24 नवंबर 2012: सरूरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग का लेंटर गिरने से ठेकेदार घनश्याम व मजदूर सिपाही की मौत।
 

कई की बचाई जान
 
ठाकुर वाड़ा में रहने वाले जैजू पहलवान व उसके दोस्त भीम ने इस हादसे में मलबे में दबे कई लोगों की जान बचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की। जैजू प्रॉपर्टी डीलर है। उन्हें बिल्डिंग गिरने की सूचना मिली तो पुलिस से भी पहले अपने दोस्त भीम के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे हुए लोगों को निकालने में जुट गए। जब तक रेस्क्यू टीम मौके पर आती तब तक वे 5/6 लोगों को मलबे के अंदर से निकाल चुके थे। 
 

 

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