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कांफ्रेस रूम में छुपे थे अवनीश, पैर तोड़ दिए थे ताकि वो कहीं भाग ने सके

dainik bhaskar news | Jul 20, 2012, 02:45AM IST
 
 


गुड़गांव.मारुति सुजूकी कंपनी में श्रमिक व प्रबंधन के बीच बुधवार देर शाम हुए विवाद में जीएम एचआर अवनीश देव की जिंदा जलकर मौत हो गई थी।
गुरुवार को उनके साले ने शव की पहचान की। हिंसा के दौरान अवनीश कांफ्रेंस रूम में छिप गए थे, बाद में उनका वहीं से जला शव मिला। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. दीपक माथुर के मुताबिक, अवनीश के बाएं पैर में दो फ्रैक्चर थे, उनकी मौत सौ फीसदी जलने से हुई।
फिलहाल उनके शव को लेकर उपजे संशय खत्म करने के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। हालांकि, यह लाश कंपनी के एचआर जीएम अवनीश देव की मानकर उनके परिजनों को सौंप दी गई है। शव इतनी बुरी तरह जला था कि चेहरा ठीक से पहचाना नहीं जा सकता।
डॉक्टर दीपक माथुर ने बताया कि ऐसे में शव का डीएनए सैंपल लिया गया है। इसे उनके परिजनों के डीएनए से मिलाया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि जो लाश मिली है, पहले उसके पीट-पीटकर पैर तोड़े गए। इसके बाद आग लगा दी गई, जिससे वह बाहर नहीं भाग सके और आग की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई। झारखंड के रांची शहर के कटरू मोहल्ला के मूल निवासी अवनीश का परिवार दिल्ली के मालवीय नगर के शिवालिक पार्क में रहता है। परिवार में एक पत्नी व एक बेटा है।
बेहद विनम्र व अच्छे स्वभाव के थे अवनीश देव
नई दिल्ली के मालवीय नगर के शिवालिक स्थित मकान संख्या ए-34 में मातम पसरा था। प्रथम तल पर रहने वाले परिवार की सारी खुशियां उजड़ चुकी हैं। मानेसर स्थित मारुति के प्लांट में हुई आगजनी में मौत का शिकार हुए जीएम एचआर अवनीश देव दरअसल इसी घर में पत्नी व बेटे के साथ रहते थे। बुधवार शाम को जब मानेसर में यह अनहोनी हो रही थी, तो अवनीश की पत्नी व बेटे इससे अनभिज्ञ थे।
रात को जब वह तय समय पर नहीं लौटे तो पत्नी ड्राइवर से फोन पर उनके बारे में पता करती रहीं। हर बार यही दुआ मनाती रहीं कि सब कुछ ठीक हो, देर रात जब पति की मौत की सूचना मिली तो मानों सब लुट गया। मूल रूप से बिहार निवासी विनय तीन माह से अवनीश का चालक है। उसने बताया कि उनके परिवार में पत्नी नेहा व बेटा अबु है। नेहा रक्षा मंत्रालय में कार्यरत हैं और वायुसेना भवन में तैनात हैं, जबकि अबु मदर्स इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं में पढ़ता है।
अवनीश बेहद नम्र और अच्छे व्यक्तिथे। वह रोज सुबह साढ़े सात बजे उन्हें कार से मानेसर स्थित कार्यालय ले जाता, रात साढ़े आठ बजे वापस लेकर लौटता था। विनय ने बताया कि अवनीश दिक्कत के समय उसकी सहायता करते थे। जब वहां हंगामा हुआ तो विनय भी बाहर भाग निकला।
रात आठ बजे मैडम का फोन उसके पास आया, उन्होंने पूछा कि साहब से फोन पर बात नहीं हो पा रही है, वह कहां है और कब तक लौटेंगे। उसने उन्हें सारे हालात की जानकारी दी, जिसे सुनकर वह बेहद घबरा गईं। गुरुवार शाम को अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर कर दिया गया।
 
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