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मौत का हो चुका था पहले ही अहसास, तबादले के लिए मार रहा था हाथ-पांव
भास्कर न्यूज | Apr 28, 2012, 02:22AM IST

आधा घंटे तक तड़पते रहे घायल : गोली कांड में घायल हुए राजेश व चंद्र हमलावरों के जाने के बाद आधे घंटे तक तड़पते रहे। वहीं घटना का पता लगने के बाद भी पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया।
तीन गाड़ियों का किया इस्तेमाल : प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमलावरों ने घटना को अंजाम देने के लिए तीन गाड़ियों का इस्तेमाल किया। वे क्रूजर और एक कार में सवार होकर आए और घटना को अंजाम देने के बाद क्रूजर को घटनास्थल पर ही छोड़ दो कारों में सवार होकर फरार हो गए। घायलों राजेश व चंद्र ने बताया कि गोलियां लगते ही वे सीट से नीचे झुक गए। इससे उनकी जान बच गई।
ताबड-़तोड़ गोलियों ने उन्हें आंख तक खोलने का मौका नहीं दिया। मौत को सिर पर नाचते देख उनके होश फाख्ता हो गए। हालांकि रामनिवास ने अपनी कारबाइन से गोलियां बरसानी चाही थी, मगर ट्रेगर दबने से पहले ही हमलावरों ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया था।
वर्ष 2009 से शुरू हुई रंजिश
15 अप्रैल 2009 की रात को कुलदीप के 20 वर्षीय पुत्र सुशील कुमार का अपहरण कर मतलौडा के पास उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पूर्व सरपंच कुलदीप सिंह के बयान पर 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। घटना के बाद कुलदीप सिंह संघर्ष समिति बनाई। इसमें करीब 45 लोगों को इस मामले में गवाह बनाया गया था। सुशील हत्याकांड में दोषी बनाए गए 15 लोगों में से 12 लोग जमानत पर रिहा कर दिए गए थे, जबकि कुख्यात कुलदीप काला सहित तीन अभी भी जेल में ही हैं
तीन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
सुशील की हत्या मामले में शुक्रवार को कुलदीप उर्फ बबलू को तो अदालत में पेश कर दिया, जबकि प्रवीन, नवीन और अजय अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत में पेश न होने पर एडीजे नरेश कत्याल की अदालत ने तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए।
कड़ी सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार : सरकारी अस्पताल में डाक्टरों के बोर्ड ने दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम किया। कड़ी सुरक्षा के बीच कुलदीप सिंह के शव को नारा गांव में ले जाया गया। वहां देर शाम अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर, रामनिवास के शव को भी परिजन ले गए।
दो दिन बाद लौटूंगा घर
नरवाना त्न खरल गांव युवक रामनिवास की पानीपत में हुई हत्या से मातम का माहौल छा गया। देर शाम तक ग्रामीण शव की इंतजार में बैठे रहे। वह अपने घरवालों से कहकर गया था कि वह जल्दी ही घर लौट आएगा। उन्होंने डयूटी पर जाने से पहले बुधवार को कहा था कि गेहूं की कटाई शुरू करवा लेना और मैं दो दिन बाद आऊंगा।
15 अगस्त 2004 से हरियाणा पुलिस सेवाएं दे रहे रामनिवास को भी शायद अपनी मौत का अहसास पहले ही था, क्योंकि वह खतरे को भांपते हुए अपने तबादले के लिए हाथ-पांव भी मार रहा था। उसने घरवालों से कहा था कि जहां मेरी ड्यूटी है, वहां किसी भी समय कुछ भी हो सकता है। वह अपने पीछे चार लड़कियां व छह माह के एक लड़के को छोड़ गया है।
रामनिवास की 6 बहनें व एक भाई है। उसकी 85 वर्षीय बूढ़ी मां ज्ञानो देवी के सिर से पति का साया कई साल पहले ही उठ चुका था। रामनिवास के मरने की खबर सुनते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं।
सारे थाने की पुलिस तेरे नाम कर द्यूं के
परिजनों ने आरोप लगाया अगर मतलौडा पुलिस कुलदीप सिंह को सिक्योरिटी देती तो उसकी जान जाती। घायल कार चालक राजेश ने बताया कि सुबह मतलौडा थाना प्रभारी ने उन्हें सिक्योरिटी मांगने पर दुत्कार दिया था। यह भी कहा था कि सारे थाने की पुलिस तेरे नाम कर दूं क्या। मतलौडा थाना प्रभारी के रवैये से खिन्न होकर वे सभी पानीपत की ओर चल दिए थे।
उधर, बेटे की मौत के बाद कुलदीप सिंह पूरी तरह टूट चुका था। लेकिन हिम्मत नहीं हारा था। बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए कुलदीप सिंह लगातार अदालत में केस की पैरवी कर रहा था और अधिकारियों के संपर्क में रहता था।
कुलदीप को भी अपनी जान का खतरा बना हुआ था। बढ़ते खतरे के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने चार मुलाजिमों की सिक्योरिटी कुलदीप के घर दिन-रात के लिए तैनात की और एक गनमैन हमेशा कुलदीप के साथ साए की तरह रहता था।
लेकिन जैसे जैसे सुशील की हत्या का मामला पुराना होता गया। वैसे-वैसे कुलदीप की सिक्योरिटी भी कम होती चली गई। उसके साथ दो गनमैन रहते थे। मगर पिछले तीन महीने से मात्र एक गनमैन रामनिवास ही था। कुलदीप सिंह की एक बेटी व एक बेटा है। बेटा अनिल हरियाणा पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात है।





