फर्जी मतदान केसः सुखबीर और रिश्तेदार आरोपी
Source: Bhaskar News | Last Updated 01:30(10/02/12)
गुड़गांव. 13 अक्टूबर 2009 को हुए गुड़गांव विधानसभा चुनाव में फर्जी दस्तावेज के बूते कई-कई फोटो पहचान युक्त मतदाता कार्ड हासिल कर फर्जी मतदान किए गए थे। इस बात का प्रमाण सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी के बाद मिला।
इस मामले में गुरुवार को अदालत ने हरियाणा सरकार के मंत्री सुखबीर कटारिया सहित उनके रिश्तेदारों को समन भेज अदालत में तलब किया है। न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी कविता कांबोज की अदालत ने सभी दस्तावेज देखने और मामले की सुनवाई के बाद प्रथम दृष्टया उन्हें आरोपी मानते हुए चार्ज सीट कर दिया है। इस मामले में अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति शुक्रवार को याचिकाकर्ता को मिलेगी।
गुड़गांव विधायक एवं सूबे के खेल राज्य मंत्री सुखबीर कटारिया के खिलाफ गुड़गांव मतदाता जागरूकता मंच और भाजपा के चुनाव चिह्न् पर गुड़गांव विधानसभा प्रत्याशी रहे उमेश अग्रवाल ने अभियान छेड़ रखा है। मंच के महासचिव ओपी कटारिया ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी के बाद मिले दस्तावेज में इस बात के प्रमाण मिले थे कि एक ही नाम और पते पर कई-कई मतदाता पहचान पत्र बनाए गए।
यही नहीं, ऐसे मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग भी किया। इस बाबत मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में भी विचाराधीन है। इसी कड़ी में मतदाता जागरूकता मंच ने मंत्री के डेढ़ दर्जन रिश्तेदारों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र किए। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए हरियाणा सरकार की वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव उर्वशी गुलाटी को शिकायत दी।
13 नवंबर 2010 की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उर्वशी गुलाटी ने 23 नवंबर 2010 को ही उपायुक्त को सभी लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468,120बी एवं आरपीए एक्ट 1950 की धारा 31 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए थे। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी हरियाणा सुमिता मिश्रा को भी शिकायत दी गई थी जिसका संज्ञान लेते हुए उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए 25 नवंबर 2010 को पत्र लिखा था।
लंबे इंतजार के बाद नवंबर 2011 में तहसीलदार राजीव शर्मा ने ओपी कटारिया का तो बयान दर्ज कर लिया, लेकिन समन के बाद भी आरोपी तहसीलदार की कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। लिहाजा मामले को ठंडे बस्ते में जाता देख मतदाता जागरूक मंच ने स्थानीय अदालत में याचिका दाखिल कर दी। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए समन जारी कर तलब कर लिया है। 2क् मार्च को मामले की पुन: सुनवाई होगी जिसमें मंत्री सुखबीर कटारिया समेत सभी को जमानत करानी पड़ेगी।
क्या है आरोप
मतदाता जागरूकता मंच के महासचिव ओपी कटारिया ने आरोप लगाए कि 18 लोगों में अधिकांश मंत्री सुखबीर कटारिया के रिश्तेदार और परिवार के हैं। इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर दो से आठ मतदाता पहचान पत्र बनाए। खुद सुखबीर कटारिया ने ही फर्जी मतदाता पहचान पत्र के लिए फर्जी राशन कार्ड को प्रमाणित किया। ये मतदाता पहचान पत्र फर्जी राशन कार्ड, दस्तावेज में हेराफेरी एवं फोटो बदल कर बनाए। राशन कार्डो में नाम और पते भी गलत दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने बाकायदा मतदान भी किया।
तहसीलदार ने इन्हें किया तलब
सुखबीर कटारिया, सुनीता पत्नी देवेंद्र राना, देवेंद्र राना पुत्र हरिपाल राणा, राजेश राना पुत्र हरिपाल, प्रभा राना पत्नी राजेश राना, ब्रम्हों देवी पत्नी कृष्ण सिंह, अंजू कटारिया पुत्री कृष्ण सिंह, अमिता कटारिया पुत्री सतबीर, गुड्डी देवी पत्नी सतबीर सिंह, रीना कटारिया पत्नी सुरजीत कटारिया, सविता सैनी पत्नी राजकुमार सैनी, रिंकी पत्नी अमीन कटारिया, फाल्गुनी सिंह पुत्री सुधीर सिंह, ऊषा पत्नी सुधीर सिंह, सुधीर सिंह पुत्र आरसी सिंह, चंदर उर्फ आरसी सिंह उर्फ एस कटारिया उर्फ सुरेश काला उर्फ राम चंद्र कटारिया, प्रदीप कटारिया पुत्र फूल सिंह और उमरावती पत्नी हुकम सिंह कटारिया के खिलाफ समन भेजा गया है।