रोहतक. तीन बार अंटार्कटिका महाद्वीप को नाप चुके देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एचएन दत्ता ने कहा कि अंटार्कटिका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। सरकार को इसका महत्व पहचानना चाहिए और लाभ उठाना चाहिए। डॉ. दत्ता बुधवार को पंडित नेकीराम कॉलेज में शुरू हुई राष्ट्रीय विज्ञान कार्यशाला में शामिल होने पहुंचे थे। इस मौके पर दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की।
उन्होंने कहा कि अंटार्कटिका पर जाने वाले विभिन्न देश वहां के संसाधनों का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि भारत ने यह पहल नहीं की है। अंटार्कटिका पर देश ने दो केंद्र मैत्री और भारती स्थापित किए हैं, लेकिन इनका देश हित के लिए प्रयोग नहीं हो रहा है। इसलिए सरकार को वहां मौजूद उर्जा को पहचाना चाहिए। गौरतलब है कि डॉ. दत्ता तीन बार अंटार्कटिका महाद्वीप पर जा चुके हैं और लगभग 200 लोगों को वहां भेज चुके हैं। इसके अलावा वे भूकंप से पहले के संकेतों को जांचने के लिए उपकरण विकसित कर चुके हैं। ध्वनिक राडार नाम का यह उपकरण भूकंप से पहले संकेत देता है, जो केवल भारत ही विकसित कर सका है।
300 किमी प्रति घंटा की गति से चलती है हवा
अंटार्कटिका महाद्वीप पर सामान्य तौर पर 300 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा चलती है। इस लिहाज से यहां ऊर्जा की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। ऊर्जा आज के दौर में सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है। ऐसे में यहां मौजूद उर्जा का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा लगभग 20 प्रकार की अन्य ऊर्जा भी वहां मौजूद हैं।