रोहतक.भला कौन ऐसा युवा होगा, जो चांद जैसी दुल्हन का ख्वाब न देखता हो। खबर यह है कि राज्य में युवाओं के इस ख्वाब पर बिजली गिरने वाली है। लिंग अनुपात में लगातार गिरावट सूबे के युवाओं को महज चंद सालों में ही इस हकीकत से रू-ब-रू करवाने वाली है। इशारा साफ है कि हालात पर जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो हरियाणा के युवाओं को जीवन संगिनी के तलाश में दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी।
लिंगानुपात में गिरावट जारी
हरियाणा के लिंग अनुपात में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बात से सभी भलीभांति वाकिफ हैं। लेकिन तस्वीर का दूसरा रुख यह है कि समय रहते इस मामले में कारगार कदम नहीं उठाए गए तो, आने वाले चंद सालों में ही हरियाणा के युवाओं के लिए दुल्हन का सपना महज सपना ही बन कर रह जाएगा।
हरियाणा नम्बर वन पर
पूरी दुनिया में भारत का लिंगानुपात सबसे कम है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दिल्ली, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में हम सबसे ऊपर हैं। वैसे भी हरियाणा लिंगानुपात के मामले में पीछे हैं। शिशु लिंग अनुपात के मामले में प्रदेश का देश में पहला स्थान है। सोनीपत, झज्जर और रेवाड़ी जिले इस मामले में सबसे ऊपर है। शून्य से 6 आयु वर्ष तक के आकड़ें और भी ज्यादा चिंताजनक हैं।
क्या है वजह
लिंगानुपात में गिरावट की मुख्य वजह कन्या भ्रूण हत्या है। प्रदेश में कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे अल्ट्रा साउंड सेंटर्स भ्रूणहत्या को बढ़ावा दे रहे हैं। मतलब साफ है कि अल्ट्रा साउंड सेंटरों में अभी भी चोरी छुपे भ्रूण जांच का काम जारी है।
आकड़े बता रहे हैं, यदि यह खेल चंद सालों तक यूं ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में युवाओं को एक अदद दुल्हन की तलाश में दूसरे राज्यों की खाक छाननी पड़ेगी। पुत्र के लिए परिवार का दबाव, साक्षरता की कमी, जन्मी कन्या के प्रति भेदभाव, समाज में प्रचलित दहेज प्रथा और लिंग जांच की आसान सुविधा लिंगानुपात का मुख्य कारण है।