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सबसे बड़ा सवाल: अशक्त विद्यार्थियों की इस उपेक्षा का जिम्मेदार कौन

कंचन गुप्ता | Nov 27, 2012, 07:12AM IST
सबसे बड़ा सवाल: अशक्त विद्यार्थियों की इस उपेक्षा का जिम्मेदार कौन

गुडग़ांव। समय सुबह 8.30 बजे। स्कूल का नाम- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बाल (सिविल लाइन)  


आयोजन- सर्व शिक्षा अभियान द्वारा अशक्त छात्रों के लिए विशेष कैंप
पहला दिन- पटौदी खंड के अशक्त छात्र जांच के लिए पहुंचे।
-निर्धारित स्कूल में  धीरे-धीरे अशक्त छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू होती है। सर्व शिक्षा अभियान से लेकर पटौदी खंड की शिक्षा अधिकारी, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी व स्पेशल टीचर्स द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया को शुरू किया जाता है। छात्र और अभिभावक जांच कब शुरू होगी पूछते दिखाई दिए। सुबह 8.30 बजे से पहुंचे किसी भी छात्र की जांच कार्य को 11.30 बजे तक भी शुरू नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग से सिर्फ मनोविशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु ही उपस्थित थे। शिक्षा विभाग के अधिकारी धूप सेंक रहे थे जबकि स्पेशल शिक्षक पंजीकरण करते दिखे। अब सवाल यह उठता है कि अशक्त विद्यार्थियों की इस उपेक्षा का जिम्मेदार कौन है।



बच्चों की उपेक्षा से नम हुई अभिभावकों की आंखें : छात्र तुषार के दादा कहते है कि पोते को चलने में मुश्किल होती है। उसे लाने ले जाने में परेशानी होती है। पिछले साल कैंप में व्हील चेयर देने के लिए लिखित में दिया गया था। अभी तक व्हील चेयर नहीं मिली। कैंप में भी कोई सही जानकारी नहीं दे रहा। समय सिंह ने बताया कि बेटे विकास की आंखों की जांच करवाने के  लिए सुबह 8 बजे से आए हुए हैं। 12 बज गए हैं लेकिन कोई चिकित्सक नहीं आया। ज्योति के पिता नरेश शर्मा और वंश गौड़ के दादा श्री भगवान भी कैंप से नाखुश दिखाई दिए।



  दोनों अभिभावकों का आरोप था कि सुबह से परेशान हो रहे हैं लेकिन न शिक्षा विभाग को हमारी परेशानी दिखाई देती है और न ही स्वास्थ्य विभाग को। अभिभावक अनूप और कांता ने बताया कि सुबह 8 बजे आकर बैठे हैं, एक बजने को है लेकिन अभी तक जांच कार्य शुरू नहीं हुआ है। समय पर पहुंचने के लिए घर से 6 बजे निकलना पड़ा था। बावजूद इसके यहां आकर अव्यवस्थाएं दिखाई दे
रही है। शेष पेजत्न९



11.50 पर डिप्टी सीएमओ ने संभाली स्थिति
स्थिति खराब होते देख डिप्टी सीएमओ डॉ. सुनीता राठी ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। देरी से आने की वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि रविवार को ही उनकी मदर का देहांत हुआ है। डॉ. राठी ने बताया कि उन्होंने चिकित्सकों की ड्यूटी लगा दी थी। उन्होंने संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को कॉल करके चिकित्सकों के न आने की वजह पूछी। इधर-उधर कॉल करके उन्होंने जैसे-तैसे चिकित्सकों को अरेंज किया।
1.07 बजे किया दैनिक भास्कर ने हस्तक्षेप
दो घंटे से स्थिति पर काबू होता न देख दैनिक भास्कर की टीम ने अतिरिक्त उपायुक्त के एम पांडुरंग को फोन पर स्थिति की जानकरी दी। उनके हस्तक्षेप से शिक्षा व स्वास्थ्य अधिकारी सक्रिय हुए।

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