पानीपत. हैपेटाइटिस बी (काला पीलिया) से बचाने के लिए गांव वालों को लगाए गए टीके ही अब उनकी जान पर भारी पड़ रहे हैं। शहरमालपुर के 300 ग्रामीण के चेहरे सूज गए हैं। बाजू की त्वचा काली पड़ गई है। ३क् लोगों को बाजू का ऑपरेशन तक करवाना पड़ गया। ग्रामीण जहां अब जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों को इस पूरे मामले की खबर तक नहीं है। एनजीओ जन समाज चेतना ने अक्टूबर २क्११ से दिसंबर तक हैपेटाइटिस बी के टीके लगाए थे। उसके बाद से ही ग्रामीण बीमारी के शिकार हो गए। ग्रामीणों ने अब एनजीओ को नोटिस दिया है।
समालखा ब्लॉक के शहरमालपुर गांव में लगाए गए हैपेटाइटिस बी के टीके के बदले प्रत्येक ग्रामीण से तीस रुपए फीस भी वसूली। नवंबर में ही करीब 100 ग्रामीणों के चेहरों पर सूजन आ गई। ग्रामीणों को अब इलाज पर कम से कम एक लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, फिर भी जान बचने का भरोसा नहीं है।
क्या है हैपेटाइटिस बी
हैपेटाइटिस बी वायरस शरीर में फैलने से काला पीलिया हो जाता है। शरीर सूखने लगता है। पेट बढ़ जाता है और लीवर कमजोर पड़ते लगता है। लीवर कैंसर के चांस रहते हैं। त्वचा पर पीलापन व काले धब्बे, थकावट से काम न कर पाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। कुछ गड़बड़ हुई होगी, तभी ग्रामीणों की हालत खराब हो गई है।-डा. तेजेंद्र खरबंदा
डीसी को खबर नहीं
॥ग्रामीणों के बीमार होने की शिकायत नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो जांच होगी। स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।-जेएस अहलावत, डीसी