मां से यह सीखने का मौका मिला था। इस कला के कद्रदानों की कमी नहीं है। सरकार प्रोत्साहित करे तो बेहतर परिणाम मिल सकता है। यह कहना है जिला नागौर गांव भांवला राजस्थान के मदनलाल का।
मदनलाल की मां भंवरी देवी एकमात्र ऐसी शिल्पकार हैं, जो सूरजकुंड मेले की शुरूआत से ही यहां आ रही हैं। मेले की शुरूआत 1987 में की गई थी। अब भंवरी देवी काफी बुजुर्ग हो गई हैं। बेटा मदनलाल उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा है। इस कला को सरकारी संरक्षण नहीं मिलने से दोनों दुखी हैं। मदन लाल 1993 से सूरजकुंड मेले में आ रहे हैं।
मदनलाल ने बताया कि वे आज जो कुछ भी हैं वह हरियाणा पर्यटन निगम की बदौलत हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान में उनके जैसे शिल्पकारों के लिए कोई कल्याणकारी योजना नहीं है। ऐसे में कइयों के सामने भूखों मरने की नौबत पैदा हो गई है। मैं अपने आप को अन्य से थोड़ा भाग्यशाली मानता हूं, क्योंकि इस तरह के मेले में कला प्रदर्शन का मौका मिल जाता है। कला को बचाए रखने के लिए मदनलाल राजस्थान के ग्रामीण स्कूल में बच्चों को खिलौना बनाने की कला सिखाने जाते हैं। इसमें कई सामाजिक संस्थाएं उनकी मदद करती है।
पहले थी कम चुनौती : भंवरी देवी कहती हैं कि खिलौना बनाने की कला मां से सीखी थी। उस समय आज की तुलना में खिलौना बिकने में परेशानी नहीं होती थी। पहले शादी या अन्य त्योहारों में गिफ्ट देने के लिए लोग इसे खरीदते हैं। आज रिमोट से चलने वाले खिलौने उपलब्ध हैं। ऐसे में चुनौती काफी बढ़ गई है।
सरकारी मदद से आस :सरकारी मदद मिले तो खिलौना बनाने वाले बेहतर कर सकते हैं। इस काम को शुरू करने में खास रकम की आवश्यकता नहीं होती है। केवल पांच हजार रुपए से भी इसे शुरू किया जा सकता है। बेकार पड़े कपड़े, बोतलें, खाली सिलाई की डिब्बी से खिलौना तैयार किया जाता है। मदनलाल ने बताया कि सरकार इस कला से जुड़े लोगों को संरक्षण और मदद उपलब्ध करवा दें तो कायाकल्प हो जाएगा।
कंट्री पार्टनर थाईलैंड के हस्तशिल्प का दिख रहा जलवा
सूरजकुंड मेले में अगर आप बैंग, कैंडल स्टैंड, ज्वैलरी, हाई सोसायटी पर्स, टोपी, छतरियां और घरों को सजाने के लिए बने सामान खरीदने के इच्छुक हैं तो पार्टनर कंट्री थाईलैंड के स्टालों पर पहुंचे। वाजिब दामों में आपको बेहतरीन हैंडमेड सामान इन स्टालों पर मिल जाएंगे।
चौपाल के पीछे सार्क देशों के स्टाल के पास ही थाईलैंड के कारीगरों व शिल्पकारों के स्टाल लगे हैं। जहां पर हाथ से बने तरह-तरह के उत्पाद थाईलैंड के शिल्पकार लेकर आए हैं। यहां पर मौजूद मैगी ट्रेडिंग कंपनी की मिस मैगी बताती हैं कि वह बंबू आर्ट से बने हाई सोसायटी 20 पर्स ही यहां लेकर आई है।
एक पर्स को बनाने में पांच से सात दिन लगते हैं। इसके अलावा ज्वैलरी आइटम व लैंस से बनी कैंप आइटम उनके यहां मिल जाएंगे। उनके स्टाल पर पांच रुपए से लेकर 2500 रुपए तक की कीमत के उत्पाद खरीदे जा सकते हैं। थाईलैंड के मिन बताते हैं कि उन्होंने फोल्डिंग पलंगों में लगने वाली पीपीसी से उत्पाद ईजाद किए हैं। उनके यहां पर ट्रॉली बैग, स्कूल बैग और कई प्रकार के आइटम मिल जाएंगे। इनकी कीमत 500 से 2500 रुपए के बीच है।
पटटारप्पा कपड़ों में लगने वाली लैस से ख़ूबसूरत आइटम बनाकर लाई हैं। यहां से टोपी और बैग की खरीदारी की जा सकती है।ये आइटम ख़ूबसूरत होने के साथ काफी महंगे भी हैं। इनकी कीमत 800 से 1500 के बीच हैं। थाईलैंड के एक अन्य स्टॉल पर मौजूद शिल्पी वाला ब्रास के कैंडल स्टैंड, प्लेट स्टैंड लेकर आए हैं। यह 400 से 3000 रुपए में खरीदे जा सकते हैं। थाईलैंड के बैंजापोन यहां साह पेपर से छतरी बना रहे हैं। यह मनमोहक छतरी पेपर की होने के बावजूद पानी से बचाती है। इसे बनाने में वाटरप्रूफ पेपर का इस्तेमाल किया गया। ये छतरी लोगों को 80 से 800 रुपए के बीच मिलेंगी।
उज्बेकिस्तानी कलाकारों पर भारत का जादू
26वें सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में भाग लेने आई उज्बेकिस्तान महिला कलाकार भारतीय संस्कृति से काफी प्रभावित हैं। अब उनकी इच्छा भारतीय लड़कों से शादी करने की है। इन महिला कलाकारों ने ने अपने लिए दूल्हा तलाशना भी शुरू कर दिया है। इन कलाकारों ने बताया कि भारत में स्त्रियों की काफी इज्जत की जाती है। यह जानने के बाद भारतीय लड़के से शादी करने की उनमें ख्वाहिश जाग उठी है। इसके अलावा ये कलाकार भारतीय डांस सीखने की भी इच्छुक हैं।
गौरतलब है कि उज्बेकिस्तान से कलाकारों का छह सदस्यीय डांस ग्रुप गौहार फरीदाबाद सूरजकुंड मेले में पहुंचा है। छह सदस्यीय ग्रुप में डांस टीचर गौहार मतियाकूबेबा, डांसर दिलनाजा, मुबारक, शाहिदा और इंतजार शामिल हैं।
टीम मैनेजर शोहरत कुदानिकूलक ने बताया कि उज्बेकिस्तान की संस्कृति भारत में मौजूद संस्कृतियों से काफी मेल खाती है। हमारे देश मे प्रत्येक त्योहार को उसी तरह मनाते हैं, जैसे यहां मनाया जाता है। डांस टीचर गौहार मतियाकूबेबा ने बताया कि उनके देश के कलाकारों ने भारतीय कलाकारों को देखकर ही डांस की तालीम हासिल की है। दिलनाजा के अनुसार उनके देश में हिन्दी फिल्में काफी शौक से देखी जाती हैं। वैजयंती माला, माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय, प्रियंका चोपड़ा, राजकपूर, शाहरुख खान, अभिषेक बच्चन, अमिताभ बच्चन के उनके देश के लोग दीवाने हैं।
हवाई दर्शन आज से
आकाश से 26 वें सूरजकुंड मेले का दृश्य देखने की दर्शकों की मुराद गुरुवार से पूरी होगी। पहले दिन बुधवार को वीआईपी मेहमानों ने इस सेवा का लुत्फ उठाया। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी आकाश से मेले के सतरंगी रंग देखे। पर्यटकों को चार मिनट के लिए आकाश से मेला दिखाया जाएगा। इसके लिए विराट एविएशन ने दो हेलिकॉप्टरों का इंतजाम किया है। एक हेलीकॉप्टर में चार और दूसरे में छह लोगों के बैठने की व्यवस्था है। एक ट्रिप के लिए दो हजार रुपए खर्च करना पड़ेगा।
यहां-वहां पॉलीथिन : मेला प्राधिकरण ने परिसर में पॉलीथिन प्रतिबंधित कर रखा है। इसके बावजूद बुधवार को बड़ी संख्या में शिल्पकार पॉलीथिन में सामान लपेटकर लाते दिखे। इसके कारण परिसर में यहां-वहां कई जगहों पर पॉलीथिन पड़ा मिला।