जरा सी लापरवाही और एक लड़की, जो बन गई लड़का

नारनौल.जन्म व मृत्यु का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इसी बात के प्रचार के लिए प्रशासन प्रति वर्ष जागरूकता अभियान भी चलाता है। किंतु सच्चाई यह है कि इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए विभाग के पास अपने कर्मचारी ही नहीं है। इसे उधार पर लिए कर्मचारियों के भरोसे चलाया जा रहा है। जो अपने काम के प्रति गंभीर नहीं है।
शिवाजी नगर में रहने वाले राजेंद्र वर्मा के घर 24 नवंबर 2003 में पौती ने जन्म लिया। विभाग के कार्यालय में उसका नाम नभ्या दर्ज करवाया गया। जिसका पंजीकरण क्रमांक: 4384 है।
इसका रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र लेने की जब राजेंद्र वर्मा को जरूरत पड़ी तो 15 जून को विभाग की ओर से जारी प्रमाण पत्र में लिंग के स्थान पर लड़का लिख दिया गया। जब राजेंद्र वर्मा ने इस गलती की तरफ ध्यान दिलाया गया तो कर्मचारियों का कहना था कि अब इसे ठीक नहीं किया जा सकता।
इसके बाद 15 जून 2012 को दैनिक भास्कर की ओर से दोबारा प्रमाण पत्र बनवाने की मुहिम छेड़ी गई तो अगले दिन जो प्रमाण पत्र विभाग की ओर से दिया गया वहां पहले दर्शाए गए लड़के की जगह लड़की दर्ज मिला। जबकि रिकार्ड में भी लड़की ही दर्ज था। जबकि दोनों की प्रमाण पत्रों पर सब रजिस्ट्रार ने हस्ताक्षर व मोहर लगाई हुई है।
नारनौल शहर की करीब 82 हजार की आबादी 23 वार्डो, 26 नव विकसित कालोनियों और हुडा सेक्टर एक में बसी हुई है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिमाह औसतन 600 जन्म, मृत्यु पंजीकरण के मामले यहां आते हैं। पर इस काम को करने के लिए विभाग के पास एक सब रजिस्ट्रार और कंप्यूटर ऑपरेटर ही है। वह ऑपरेटर भी एनआईसी की तरफ से भेजा गया है। जबकि सब रजिस्ट्रार के पास स्वास्थ्य विभाग का फैमिली प्लानिंग का भी अतिरिक्त प्रभार है।
क्लर्क के तौर पर यहां जो कर्मचारी लगा हुआ है। उसने अप्रैल माह में ही स्वास्थ्य विभाग में अपनी नौकरी ज्वाइन की थी। उसे अस्पताल में लगाने की बजाए, नगर परिषद में चल रहे जन्म मृत्यु पंजीकरण विभाग के दफ्तर में बतौर डेपुटेशन भेज दिया गया। इसी तरह आंकड़े एकत्र करने वाले डीसी रेट में लगे नगर परिषद के दो कर्मचारियों को भी विभाग ने अतिरिक्त जिम्मेवारी देकर बैठाया गया है।
जन्म व मृत्यु पंजीकरण विभाग का यह काम पहले सिविल अस्पताल में होता था। किंतु अब इसे नगर परिषद में किया जा रहा है। प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी पिछले वर्षो के डाटा फीड करने का काम कर रहे हैं। क्योंकि नारनौल शहर में पंजीकरण का यह काम वर्ष 1969 से चला आ रहा है।
हाथ से बनते हैं प्रमाण पत्र
नियमानुसार किसी भी बच्चे के जन्म अथवा व्यक्ति की मृत्यु पर विभाग की ओर से जो प्रमाण पत्र बनाकर दिए जाते हैं, वे कंप्यूटराइज्ड होने चाहिए। ऐसे प्रमाण पत्रों का हर परिवार और व्यक्ति के लिए बहुत महत्व होता है।
किंतु इस कार्यालय से कंप्यूटराइज्ड प्रमाण पत्र देने की बजाए हस्त लिखित प्रमाण पत्र जारी किए जाते है। विभाग के पास जो पुराना रिकार्ड है, वह भी रजिस्टरों में ही दर्ज है। उसे भी अभी तक कंप्यूटराइज्ड नहीं किया जा सका है।






