विज्ञापन
 
Home >> Haryana >> Rohtak >> Reservoir Case: Now Discovered 27 Years Ago Is Dea

हौज कांड: अब पता चला 27 साल पहले मर चुका है पति

प्रदीप नारायण | Jul 29, 2012, 02:37AM IST
 
 

रेवाड़ी. हौज नरसंहार के 27 साल तक छिपा सच टुकड़ों में सामने आने लगा है। नरसंहार में एक फौजी भी चपेट में आ गया था। जिसकी शिनाख्त टीपी गर्ग आयोग की शुरू हुई जांच के बाद हुई। यानी 27 साल तक फौजी की पत्नी कंवलजीत कौर को पति के मरने की जानकारी मिली।



पीड़िता ने गर्ग आयोग में अब याचिका दायर कर दी है कि उसे न्याय दिलाया जाए। इकलौती बेटी चरणजीत को सरकारी मिले। गौह हो कि 31 जुलाई आयोग के सामने होने वाली बहस में दफन हो चुके सच को सामने लाने की पहली तारीख होगी। 22 फरवरी 2011 यानि 26 साल बाद जब इस दबाए गए नरसंहार को उजागर किया गया।


गुवाहटी से पंजाब के लिए निकला था इंद्रजीत

अभी तक आयोग की टेबल पर आने वाले आन रिकॉर्ड के मुताबिक जेएके राइफल्स रेजीमेंट का जवान इंद्रजीत सिंह मेडिकल लीव पर बेस अस्पताल गुवाहाटी से पंजाब के गांव प्रतापगढ़ तहसील बटाला जिला गुरदासपुर के लिए रवाना हुआ था। 31 अक्टूबर को 1984 को दिल्ली पहुंचा तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में तनाव था।


दंगाइयों से बचने के लिए इंद्रजीत गलती से जयपुर जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। रेवाड़ी स्टेशन पर उतरकर देखा तो दिल्ली जाने वाली सभी ट्रेनें बंद कर दी गई थी। वह पैदल ही दिल्ली के लिए चल पड़ा और 2 नवंबर को सुबह जब वह इंछापुरी स्टेशन तक पहुंचा तो किसी ने सिखों की ढाणी हौज जाने की सलाह दी। इंद्रजीत हौज पहुंचा तो वहां उत्तम सिंह ने रहने की जगह दी। जाटूसाना पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक शाम 6 बजे सैकड़ों की संख्या में दंगाइयों ने हौज को घेर लिया और नरसंहार को अंजाम दे दिया। दंगों में फौजी को भी मौत के घाट उतार दिया गया।


पहला शक : हमला सुनियोजित तो नहीं था

पीड़ितों की तरफ से केस लड़ रहे एडवोकेट रणजीत सिंह के मुताबिक सबसे पहले एफआईआर को आधार बनाया गया है। घटना के 24 घंटे का अधिक समय बीत जाने के बाद थाना में 3 नवंबर को रात 9.35 बजे शिकायत दर्ज करवाई गई। डी-डीआर नंबर पांच यह एफआईआर ही बहुत कुछ उजागर करती है कि यह हमला परिस्थिति वश था या सुनियोजित। 31 जुलाई को हिसार में बनी आयोग की कोर्ट में सबसे पहली बहस इस एफआईआर पर होगी। आयोग हौज नरसंहार के बाद जाटूसाना थाना में दर्ज की गई रिपोर्ट पर सवाल उठा रहा है।


रिपोर्ट के मुताबिक 2 नवंबर 1984 को सुबह 11 बजे दंगाई ट्रकों में भरकर चिल्हड़ पहुंचे। ग्राम पंचायत व ग्रामीणों ने उन्हें समझा कर वापस भेज दिया। इस बारे में सिखों को सूचना नहीं दी गई और न ही पुलिस को बताया गया। शाम 6 बजे भारी तादाद में दंगाइयों ने हौज को चारों तरफ घेर लिया और हमला कर 31 लोगों को जिंदा जला दिया। रात 11 बजे तक यह खूनी खेल खेला गया।
 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
9 + 9

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment