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अब कहां जाएं ये.. रोज मर रहे राष्ट्रीय पक्षी, कैसे थमेगा सिलसिला

 
Source: ज्ञान प्रसाद   |   Last Updated 06:05(04/02/12)
 
 
 
 
रोहतक. रेवाड़ी . बाग में मोर नाचा किसने देखा...भले यह किसी फिल्मी गीत के बोल हों लेकिन यदि करंट लगने से मोरों की मौत इसी प्रकार होती रही तो भविष्य में यह हकीकत में पूछने लायक हो जाएंगे। आए दिन करंट लगने से राष्ट्रीय पक्षी मोर अकाल मौत का ग्रास बन रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है इसका जवाब न तो वन विभाग के पास है और न प्रशासन के पास। कोई भी बताने की स्थिति में नहीं है। बेजुबान पक्षियों की स्वतंत्रता पर ग्रहण लगने लगा है।

घटते वन क्षेत्र और औद्योगिकरण के चलते राष्ट्रीय पक्षी के साथ अन्य उड़ने वाले पक्षियों की जान खतरे में पड़ती जा रही है। हरियाली और घने पेड़ के साथ ऊंचाई वाले स्थानों की तलाश में उड़ते ये पक्षी अकारण ही अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं। ग्रामीण जब इन्हें देखते हैं तो अपने स्तर पर उन्हें बचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन दवा और उपचार की व्यवस्था करने में लाचार होने के कारण नजरों के सामने तड़पते इन बेजुबान की आह और आखों से बहते आंसू मूकदर्शक बनकर रह जाते हैं।

करीब एक साल से अधिक समय से बिजली निगम हाईटेंशन तारों पर इंसुलेटेड टेप चढ़ाने की कार्रवाई कर रहा है। इसके बावजूद मोरों की मौत बदस्तूर जारी है। यह स्थिति तब और दयनीय होती है जब करंट की चपेट में फडफ़ड़ाते हुए जमीन पर गिरते हैं तो समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण तिल तिल कर मरने को मजबूर होते हैं।

यह घटना कभी कभार नहीं घट रही बल्कि आए दिन किसी न किसी गांव में कोई न कोई मोर करंट की चपेट में आने से जान गंवा रहा है। इसके अलावा तोता, कौआ और अन्य पक्षी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

एक सप्ताह में आधा दर्जन मोरों की मौत हुई

विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक साल में पांच सौ से अधिक मोरों की मौत हो चुकी है। वहीं कितने नए मोरों की संख्या बढ़ी है इसका आंकलन विभाग के पास भी नहीं है। एक सप्ताह के अंदर ही लाधुवास गांव में ही तीन दिन में लगातार प्रतिदिन एक मोर मर रहा है।

कोसली उपमंडल के गांव कोहारण में एक फरवरी को करंट से मोर की मौत हुई। इसके अलावा सप्ताह में कोसली, कुंड, रेवाड़ी खंड के विभिन्न गांवों में आधा दर्जन से अधिक मोरों की मौत होने की सूचना ग्रामीणों की ओर से प्रशासन को दी जा चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से कई मोरों की अकारण मौत समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण हुई है। यदि चिकित्सीय उपचार समय पर मिल जाए तो अधिकांश की जान बचाई जा सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि निगम की ओर से हाईटेंशन तारों पर इंसुलेटेड टेप चढ़ाने से कोई फायदा नहीं हो रहा है। इन तारों के आसपास आते ही पक्षियों को बिजली का करंट अपनी ओर खींच लेता है जिससे वे या तो मर जाते हैं या फिर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं जो कि समय पर उपचार मिलने के अभाव में मर जाते हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस संबंध में कोसली, झज्जर रोड स्थित दक्षिण हरियाणा बिजली निगम पावर हाउस के कार्यकारी अभियंता नवीन वर्मा का कहना है कि विभाग भी मोरों की मौत को लेकर चिंतित है। यही कारण है कि पिछले एक साल से गांव के तालाबों, खेतों, घने पेड़ों और वन क्षेत्र के आसपास से गुजर रहे हाईटेंशन तारों को इंसुलेटेड तार लगाए गए हैं। इसके अलावा बिजली शेड्यूल भी बदला गया है। उनके क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में हाईटेंशन तारों पर इंसुलेटेड टेप चढ़ाने का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा भी जहां से इस प्रकार की शिकायत आती है वहां तुरंत कार्रवाई करते हुए इंसुलेटेड टेप लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार धारूहेड़ा स्थित बिजली निगम पावर हाउस के कार्यकारी अभियंता आरएस यादव का भी कहना है कि विभिन्न फीडरों के अंतर्गत सप्लाई होने वाली बिजली शेड्यूल शाम साढ़े पांच बजे के बाद ही चालू की जाती है, ताकि पक्षियों को ठिकाना तलाशते वक्त किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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