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गेहूं की आठ व जौ की तीन नई वैरायटी रिलीज

Bhaskar News | Feb 06, 2013, 04:45AM IST
 
 

करनाल.  गेहूं अनुसंधान निदेशालय ने गेहूं की आठ और जौ की तीन नई वैरायटी रिलीज की हैं। हाल ही में केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति की 65वीं बैठक में इनके विमोचन की अनुशंसा की गई थी।
 
किसान इन किस्मों की बिजाई करके पांच से 10 फीसदी अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। गेहूं की इन किस्मों में छह अगेती और दो पछेती हैं। जबकि जौ की एक किस्म ऊसर व लवणीय भूमि के लिए है।
 
गेहूं की किस्म व उनकी खासियत
 
डब्ल्यूएच 1105 : पहाड़ी क्षेत्रों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड तथा हरियाणा पंजाब में समय से बिजाई की जा सकती है। यह हाई प्रोडक्शन देने वाली वैरायटी है, जो पहले की किस्मों से 5 से 10 गुणा उत्पादन अधिक देगी। 145 दिनों में पक जाएगी।
 
एचडी डब्ल्यू 359 :   उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के सिंचित क्षेत्र के लिए अच्छी है। यह वैरायटी अपनी श्रेणी की पहले वाली वैराइटी से साढ़े पांच प्रतिशत अधिक उत्पादन देगी। पकने के दिन 120  
 
एचआई 8713:  मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात व पूर्व राजस्थान में समय से बुआई के लिए यह कठिया गेहूं की किस्म है। पहली किस्मों से इसका उत्पादन चार प्रतिशत अधिक रहेगा।
 
 
डब्ल्यूएचडी 948 :     महाराष्ट्र, तमिलनाडु व पठारी भागों के लिए समय से बुआई के लिए यह कठिया गेहूं की किस्त है। इसका उत्पादन नौ प्रतिशत बढ़ोतरी में रहेगा। १२क् दिन में पक जाएगा।
 
 
डीबी डब्ल्यू 71:  उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड में पछेती बिजाई के लिए। यह भी हाई प्रोडक्शन की वैरायटी है, जो आठ से 10 प्रतिशत बढ़ोतरी उत्पादन देगी। पकने में 120 से 130 दिन लगेंगे।
 
 
राज. 4229:  उत्तरी पूर्व क्षेत्रों पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल एवं सुदूर पूर्व के मैदानी भाग के लिए उपयुक्त है। उत्पादन साढ़े चार गुणा अधिक है और इसमें रोग सहने क्षमता अधिक है। पकने के दिन140 
 
 
एमपी 3336:  मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात एवं पूर्वी राजस्थान में पछेती बुआई के लिए है। पछेती होने पर भी इसमें अधिक उत्पादन व बीमारी रोधक क्षमता अधिक है।
 
 
एचडब्ल्यू 5216:  दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्रों में समय से बुआई के लिए उपयुक्त है। इसमें 15 प्रतिशत अधिक उत्पादन देने की क्षमता है, जो पकने में 135 से 140 दिनों का समय लेगी।
 
जौ की नई किस्म व खासियत
 
डब्ल्यूआर 91: जौ की नई किस्म उत्तरी पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए ईजाद की गई है। यह किस्म नौ प्रतिशत अधिक उत्पादन देगी। इसकी विशेष खासियत माल्ट की अच्छी क्वालिटी रहेगी। नॉर्मल समय में पकती है।
 
आरडी 2786 :  जौ की इस नई किस्म को मध्य क्षेत्रों के लिए बनाया गया है। यह किस्म 15 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन दे सकती है। इसकी ग्रेन क्वालिटी अधिक अच्छी है, जो कि अधिक बीमारी सहनशील भी है।
 
आरडी 2794 : ऊसर व लवणीय भागों के लिए इस किस्म को ईजाद किया गया है। यह किस्म लवण ग्रस्त क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसके पकने की अवधि नॉर्मल है।
 

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