छरहरी काया की चाहत में बिगाड़ रही हैं अपनी सेहत
Source: bhaskar news | Last Updated 02:32(07/02/12)
फरीदाबाद. औद्योगिक नगरी की 65 फीसदी युवतियां एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही हैं। यह सच इंदिरा गांधी बाल स्वास्थ्य योजना (आईबीएसवाई) के तहत किए गए सर्वे से सामने आया है।
सर्वे चार चरण में किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में एनीमिया पीड़ित महिलाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण छरहरी काया पाने के चक्कर में जरूरत से ज्यादा डायटिंग और संतुलित आहार नहीं लेना है। पीड़ितों में से अधिकांश की उम्र 16 से 35 साल के बीच है। आईबीएसवाई प्रोग्राम के तीन फेज की इंचार्ज रही डॉ. बीना शर्मा के अनुसार फरीदाबाद में बड़ी संख्या में रूरल और स्लम एरिया हैं। सर्वे के दौरान सबसे अधिक परेशानी इन्हीं क्षेत्रों की युवतियों में देखने को मिली है। इन जगहों पर रहने वाली युवतियों को सही डाइट की जानकारी नहीं है। साथ ही वे अपने स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूक नहीं हैं। 25 फीसदी युवतियां पतली व छरहरी दिखने के चक्कर में अनबैलेंस्ड डायटिंग कर खुद को एनीमिया का शिकार बनी हैं।
ले संतुलित आहार : डॉ. शर्मा के अनुसार बॉडी को पूरा पोषण नहीं मिलने पर नींद आना, जल्दी थकान होना, सांस फूलना, सिर में दर्द होना छाती में दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में सबसे पहले मरीज की डाइट चेंज की जाती है। डाइट में हरी सब्जियां, फल व नॉन-वेजिटेरियन चीजें शामिल की जाती हैं। ड्राई फ्रूट्स भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।फलों में संतरा, आम, सेब, अनानास वगैरह लिया जा सकता है। इनमें आयरन अच्छी मात्रा में होता है। संतुलित आहार के बावजूद एनीमिया की शिकायत बनी हुई है तो इसका मतलब है कि ऑक्सीजन रेड ब्लड सेल्स को बॉडी तक नहीं पहुंचा पा रहा है।
इस स्थिति में पीड़ित को थकान जल्दी आती है। ऐसे में पेशेंट को आयरन, विटामिन, फोलिक एसिड आदि दी जाती है। जरूरत पड़ने पर ब्लड ट्रांसफर भी किया जा सकता है। इसे गंभीरता से नहीं लेने पर बोन मैरो तक ट्रांसप्लांट करने की नौबत पैदा हो जाती है।