मंडी.नेशनल हाईवे-21 पर कीरतपुर से नेरचौक तक फोरलेन बनाने को केंद्र सरकार से मंजूरी दे दी है। वीरवार को केंद्रीय कैबिनेट कमेटी ऑन इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 84.380 किलोमीटर लंबे रोड को बिल्ट-ऑपरेटर-ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर मंजूरी दे दी है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर ने बताया कि पंजाब के कीरतपुर और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर और मंडी जिलों से होकर निकलने वाले इस फोरलेन के निर्माण पर 2356.20 करोड़ की लागत आएगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने से इस मार्ग पर सफर बेहद आसान हो जाएगा। वहीं पैसे और समय की भी बचत होगी।
प्रदेश की इस महत्वपूर्ण परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही इसका श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री दावा करते हैं कि इस परियोजना के लिए सरकार ने भू-अधिग्रहण का अनापत्ति प्रमाणपत्र तक केंद्रीय परिवहन एवं भूतल मंत्रालय को दे दिया है।
केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि केंद्र की कैबिनेट कमेटी ऑन इकनॉमिक्स ने नेशनल हाईवे डवलपमेंट प्रोग्राम के तहत मंजूर किया था, उस वक्त प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। चंडीगढ़-दिल्ली के बाद कीरतपुर-मनाली हाईवे पर हर दिन सबसे ज्यादा वाहनों की आवाजाही होती है।
बरमाणा में एसीसी सीमेंट कारखाना होने की वजह से हजारों ट्रक भी इसी रोड़ से रोजाना सीमेंट ढोने का काम करते हैं। इस रोड पर जाम लगना आम बाद है। जाम में पर्यटकों को घंटों फंसे रहने को मजबूर होना पड़ता है। अब लोगों और पर्यटकों को अब निजात मिलेगी।
सामरिक दृष्टि से अहम लेह के लिए राजधानी दिल्ली से यह अहम लिंक है। इसी प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल मनाली आता है। कीरतपुर तक पहले ही फोरलेन हो चुका है। अब नेरचौक तक 84 किलोमीटर के ओर फोरलेन होने से सफर पहले से ज्यादा सुहाना हो जाएगा।
भू-अधिग्रहण के लिए 537 करोड़
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में भू-अधिग्रहण के लिए 537.37 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। यह राशि फोरनेल के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का मुआवजा, प्रभावित होने वाले लोगों के विस्थापन पर खर्च, पुनर्वास के कार्यो के ऊपर खर्च और निर्माण से पूर्व की तमाम औपचारिकताओं पर खर्च होगी।