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सावन और भादो के लिए जाग उठे गुग्गापीर
Bhaskar News
| Jul 16, 2012, 03:56AM IST

क्या है धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास आते ही जहां दो माह के लिए देवता सो जाते हैं, वहीं गुग्गापीर अपनी चीर निंद्रा से जाग उठते हैं। सिरमौर के प्रमुख देवता शिरगुल, जमनाग, महासू, बिजट महाराज, चामड़िया, भूमिया और ब्रह्मा आदि श्रावण और भाद्रपद माह में सो जाते हैं।
जन्माष्टमी को जागेंगे देवता
धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि दो माह के विश्राम के बाद कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर देवता जागते हैं। इस बीच बागड़ देश (राजस्थान) के राजकुमार गुग्गापीर ही जागकर अपनी प्रजा की रक्षा करते हैं।
गुग्गापीर की पूजा होगी
दो माह में लोग गुग्गापीर की पूजा अर्चना करने में लीन रहते हैं। शहर और गांव में गुग्गापीर की छड़ियां घुमाई जाती हैं। भक्तजन गुग्गा को साथ घुमाते हैं। अधिकतर घरों में गुग्गापीर का आह्वान कर रातभर भजन और कीर्तन होता है। लोग गुग्गा को अनाज आदि दान कर रक्षा की कामना करते हैं। ऐसी भी मान्यताएं हैं कि कोई श्रद्घालु यदि मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाता है तो भगवान उसकी पुकार नहीं सुनते। चूंकि देवता दो माह के लिए सोए होते हैं।
जहरीले जीवों से बचाते हैं गुग्गापीर
श्री गोरखनाथ के शिष्य गुग्गा को अपने जीवनकाल में कई कष्टों और संकटों का सामना करना पड़ा। गुग्गा का सारा जीवन तपस्या और संघर्ष के बीच गुजरा। उन्होंने अपने तपोबल से कई दिव्य शक्तियां प्राप्त कीं। उल्लेखनीय है कि सावन माह में भारी बरसात के दौरान जहरीले जीवों का अधिक खतरा बना रहता है। अधिकांशत: ग्रामीणों और किसानों को घरेलू कामकाज के समय सांप, बिच्छू व अन्य जहरीले जीवों से परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रजा को कोई कष्ट न हों इस कारण गुग्गापीर अपनी निंद्रा से जागकर प्रजा को हर एक संकट से बचाते हैं।






