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छाती पीट-पीट कर रोए लोग
Bhaskar news
| Aug 12, 2012, 01:37AM IST

दुर्घटना की सूचना आग की तरह चंबा से लेकर भरमौर तक फैल गई। इसके बाद सैकड़ों लोग और मणिमहेश यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के जत्थे भी दुर्घटनास्थल पर बचाव कार्यो में जुट गए। हादसा इतना बड़ा था कि आपदा प्रबंधन के लिए जुटाई गई सारी व्यवस्थाएं बौनी साबित हुईं।
कंट्रोल रूम नहीं बनाया
घटनास्थल से लेकर चंबा अस्पताल तक घायलों और मृतकों के परिजनों की चीखोपुकार से पूरा दिन अफरातफरी का माहौल रहा। दोपहर बाद तक जिला प्रशासन द्वारा कंट्रोल रूम स्थापित न करने के चलते दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों से घायलों और मृतकों के परिजनों को अपनों को ढूंढने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश भी पनपता गया।
स्ट्रेचर भी नहीं मिले
ग्रामीणों ने स्ट्रेचर और अन्य सुविधाओं की कमी के बावजूद गहरी खाई से शवों और घायलांे को कंधों पर उठाकर ही सड़क तक पहुंचाया। प्रशासन के लिए भी इतनी अधिक संख्या में एकाएक शवों को ढोना मुश्किल भरा साबित हुआ। इसके चलते घटनास्थल पर ही अस्थायी शिविर लगाकर शवों का पोस्टमार्टम किया गया। शव की शिनाख्त और पंचनामा करने के बाद घटनास्थल पर ही घर वालों को सौंप दिए।
फौरी राहत की घोषणा
जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 1-1 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायल यात्रियों को 50-50 हजार रुपए तथा आंशिक रूप से घायलों को 10-10 हजार की फौरी राहत देने की घोषणा की।
खस्ताहाल थी दुर्घटनाग्रस्त बस
दुलाड़ा से चंबा के लिए एकमात्र निजी बस सेवा होने के चलते बस में प्रतिदिन ओवरलोडिंग होती थी। शनिवार को इस बस में दुर्घटना के समय 100 से अधिक यात्री सवार थे। इनमें से 8 से 10 यात्री जो बस के पीछे लटके थे, बस के खाई में गिरने से पहले ही छलांग लगाकर बच निकले। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 35 सीटर बस खस्ताहाल थी। जिसके चलते यह दुर्घटना घटित हुई।
मिंजर में खरीदारी के लिए जा रहे थे
अधिकतर यात्री मिंजर मेले के अंतिम दिन साल भर की खरीदारी के लिए चंबा जा रहे थे। मेले के अंतिम दिन हर वर्ष चंबा में खरीदारी के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है। शनिवार को भी मिंजर मेले में खरीदारी का अंतिम दिन था। इसके चलते कई ग्रामीण क्षेत्रों के लोग साल भर की खरीदारी के लिए चंबा आ रहे थे कि बस का अगला टायर खुलने से बस गिर गई।
भाजपा राजनीति में थी मशगूल : कौल सिंह
॥भाजपा संवेदनहीन है। एक ओर खटारा बस मालिक के लालच ने एक नहीं कई लोगों को समय से पहले मौत का निवाला बना दिया। वहीं हमीरपुर में भाजपा राजनीति करने में मशगूल थी। लोगों पर दर्द का पहाड़ टूटा हुआ था तो दूसरी ओर विधानसभा चुनाव के नजर आ रहे थे। मुख्यमंत्री धूमल को रैली छोड़कर चंबा दौरे पर जाना चाहिए था।
कौल सिंह ठाकुर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
52 मृतकों की सूची
सैली के विवेक (11), सुरेंद्र (12), केवल शर्मा (25) बीना देवी (32), डावरा के सुरेंद्र (28), गागला के चमन (35), टिक्को देवी (55) हंसराज (२३), टिप्परी की अवतु देवी (५क्) और विन्दो (५५), बगान की रीनू (३क्), स्वार की कुन्तो (५क्), परोह के तिलको (४क्), काकरेट के पप्पू (२४), बगा के पवन कुमार (२४), बाढ़का के विपन कुमार (२६), डेढू की गिलमो (५५), खार के किशोरी लाल (१७), गरोथा की चंचलो (३२), सरेहड़ के इस्माइल (४५), अलीसा की सीना (२२), शीना (४क्) और रफी मुहम्मद (२७), कुठेड़ के नाल हुसैन (२२), सफी मुहम्मद (३५) और समसदीन (६४) और कैथला की रीता (१८) देवी सिंह (३८), किशोर कुमार (१९), कुलदीप सिंह (३२), संजू (२१), मकीनू राम (३३), पंजू राम (३२), किशनो (३२), प्रताप चंद (२८), प्रदीप कुमार (४क्), लंबू (४क्), लीला (२६), तिलको (३८), फंको देवी (५५), घनिया (५८), कावु, रिंकू, प्रेमु, नरेश कुमार, शोभा, अनीता, बबलु, सुमना, सुरेखा, डालो, नरेंद्र और रिंटू शामिल हैं।
40 घायलों की सूची
गरौंठा की लालो (36), दुलाड़ा के अश्वनी कुमार (3८), हरनाम (२४), सीमा (१९), गागला के कुलदीप (२५), पूजा (११), राजकुमार (४क्), गुडडू (२५), बिंदु (२क्), मिंदर (३६), रिंटू, सोनू, अक्षय और बालकृष्ण (३७), सुनारा का अमित कुमार (१२), परोह के त्रिलोक (२१), बड़का के सुरेंद्र (४४) और रतन सिंह (५४), परगोला के केवल (१७), थरेड़ की साफी (२७), थरेड़ की मसूम (१८), अंदराल पट्टा के लातीफ (२८) और एमना (२क्), धलोटी के कुलदीप (२६), बंबरोऊ के कमलेश (३९), ग्रोरंठा के ठेठी राम (१६), सुवाण के पवन कुमार (२४) व हितेंद्र, मैहला के हितेश (१६), खगरेटू के देवेंद्र (८क्), कंदराल की विमला (२७) और किशनो देवी, कलदरा की मनीता (३५), सुवारा की तुलसी (४क्), लिला की कुशल्या (१८), सैली की सुभद्रा (४क्), चैडला के ओम प्रकाश (२७), थरेड़ के लालू (१७), टिफरी के अभिषेक (११) और चनैला की विमला (५क्) शामिल हैं।








