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फाइल नंबर-2हमीरपुर, 9 दिसंबर, रविवार, 2012अब मरीज की हर पर्ची पर रहेगी पैनी नजर, हैवी डोज लिखी तो कसेगा शिकंजा, सीएमओ को निदेशालय के निर्देश जारी

Matrix News | Dec 10, 2012, 01:06AM IST
फाइल नंबर-2हमीरपुर, 9 दिसंबर, रविवार, 2012अब मरीज की हर पर्ची पर रहेगी पैनी नजर, हैवी डोज लिखी तो कसेगा शिकंजा, सीएमओ को निदेशालय के निर्देश जारी
क्चअश्वनी वालिया. हमीरपुर
क्चअब सरकार स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को ओपीडी स्लिप पर लिखी जाने वाली दवाइयों पर विभाग की पैनी नजर रहेगी। वहां लिखी जाने वाली दवाइयों के साथ-साथ लैब टेस्ट जो डॉक्टर अनावश्यक रूप में लिखेंगे उन पर शिकंजा कसा जाएगा। निदेशालय ने सभी जिलों के सीएमओ को एक पेज की गाइड लाइन्स ईमेल की है। ताजा निर्देशों के तहत जहां कई स्थानों पर लिखी जाने वाली महंगी दवाइयों पर अंकुश लगेगा वहीं सरकार की मरीजों को जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध करवाने की योजना को भी बल मिल सकेगा। सूत्रों के मुताबिक निदेशालय सहित सरकार के पास भी कई शिकायतें पहुंची हैं। जिसमें कई डॉक्टर्स द्वारा बाहरी लैबों से खून टेस्ट या जरूरत से ज्यादा दूसरे महंगे टेस्ट लिखने की बातें सामने आई हैं। उसी को आधार बनाते हुए यह निर्देश जारी किए गए हैं। हर सीएमओ फील्ड सहित जिला अस्पतालों में किसी भी अधिकारी को इसके चैक का जिम्मा सौंप सकेंगे। यदि कोई डॉक्टर इस दायरे में पाया गया तो उसे नोटिस भी जारी होगा। वहीं उसकी शिकायत बाकायदा निदेशालय को भी जारी होगी।
पहले लिखी जाए हल्की डोज
बहुत से ऐसे मरीज होते हैं जिनका मर्ज हल्की डोज से भी सुधर सकता है। लेकिन कई बार डॉक्टर उसे डोज दवाइयां लिख देते हैं। यह दवाइयां जहां महंगी होती हैं वहीं मरीज द्वारा बार-बार हैवी डोज दवाई लेने से उसे हल्की डोज दवा असर नहीं कर पाती। इसे सुचारू करने के लिए राज्य भर में सरकार ने जेनेरिक औषधी केंद्र खोले हैं। लेकिन वहां हल्की डोज दवाइयां सस्ती उपलब्ध होने पर भी यहां की प्रति सेल एक से दो हजार तक है। जाहिर है डॉक्टर कई जगह अक्सर हैवी डोज दवाइयां ही लिख रहे हैं। यही कारण है कि जो निर्देश जारी हुए हैं उनमें साफ कहा गया है कि मरीजों की प्रिस्क्रिप्शन को सीएमओ चैक रखेंगे। यानी ऑडिट होने पर जो मरीज की स्लिप पकड़ी गई उससे संबंधित डॉक्टर को क्लियर करना होगा कि क्या कारण हैं। मरीज की बीमारी का भी पर्ची पर पूरा उल्लेख करना होगा।
कोट
सभी सीएमओ को गाइडलाइन जारी की गई है। मरीजों की लिखी गई प्रिस्क्रिप्शन का ऑडिट किया जाएगा। हर जिले में कैसा कार्य चल रहा है। मरीजों को कितनी बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। इस बारे हर सीएमओ को देखना होगा।
डॉ.डीएस चंदेल, स्वास्थ्य निदेशक, हिमाचल
  
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