हमीरपुर जिला के पांच विधानसभा क्षेत्रों में असमंजस
Source: विक्रम ढटवालिया | Last Updated 03:33(07/02/12)
हमीरपुर चुनावी वर्ष में भी भाजपा के गढ़ कहलाए जाने वाले हमीरपुर जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की चुनावी राजनीति असमंजस से भरी हुई है। विडंबना ये है कि विधायक भी अपने-अपने क्षेत्रों को लेकर ऊहापोह वाली स्थिति में हैं। मोटे तौर पर यह भी कहा जाए कि कौन कहां से चुनावी दंगल में उतरेगा, इस पर पार्टी की खींचतान कम होने की बजाय इस बार मुसीबत से भरी दिख रही है। जिले में पांच में से भाजपा के कब्जे में चार सीटें हैं। जबकि एक पर कांग्रेस के विधायक लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हुए हैं।
भाजपा की इस असमंजस वाली स्थिति से कांग्रेस की मुसीबतें भी उसका पीछा नहीं छोड़ रहीं। लेकिन भाजपा के लिए यदि उसके नेताओं का रवैया असमंजस से बाहर नहीं निकला तो इससे पार्टी को ही नुकसान होगा। मगर इसमें भी बड़ी विडंबना यह है कि आला नेता को जिला की अंदरुनी स्थिति का सही आकलन करवाने की हिम्मत कौन जुटाएगा। पार्टी में ये भी चिंता है।
भाजपा की लड़ाई पर कांग्रेस की नजर
हमीरपुर से उर्मिल विधायक हैं। डी-लिमिटेशन के कारण बमसन के अस्तित्व को खत्म करके सुजानपुर नया क्षेत्र बना है। उर्मिल सुजानपुर जाएंगी या मुख्यमंत्री स्वयं संभालेंगे क्षेत्र को। दोनों मंडलों की इसके कारण खींचतान है। सीएम चुनाव क्षेत्रों को लेकर पत्ते नहीं खोल रहे। इससे दोनों जगह कांग्रेस भी ऊहापोह में होने के बावजूद भाजपा की लड़ाई पर नजरें गाड़े हुए है।
आईडी धीमान बेटे पर खेल सकते हैं बाजी
नादौनता का नाम अब बड़सर हो गया है। वहां से बलदेव शर्मा विधायक हैं। वे नादौन में भी बिसात बिछाए हुए हैं। मेवा का नाम भोरंज हो चुका है। यहां से आईडी धीमान चौका लगा चुके हैं। चर्चा है कि वे बेटे अनिल धीमान को कमान संभालेंगे। मगर नए समीकरणों में क्या पार्टी राजनीति इस फार्मूले पर अब सवार हो ही जाएगी या फिर नया रिस्क नहीं उठाएगी।