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सर्दियां शुरू होते ही बिजली संकट

प्रकाश भारद्वाज | Dec 09, 2012, 06:14AM IST
सर्दियां शुरू होते ही बिजली संकट
शिमला.  विद्युत राज्य होने के बावजूद प्रदेश को घरेलू उत्पादन के लिए हाथ फैलाने की नौबत आ गई है। मैदानी राज्यों में उजाला करने वाले राज्य में अंधेरे का संकट पैदा हो गया है।
 
प्रदेश में घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों की विद्युत जरूरत को पूरा करने के लिए हर रोज एक हजार से 1200 मेगावॉट बिजली चाहिए। सर्दियां एक पखवाड़ा पहले शुरू होने से नदियां का पानी जमने लगा है और विद्युत उत्पादन तेजी से नीचे गिर रहा है। 
 
तीन बड़े पॉवर प्रोजेक्टों 1500 मेगावॉट क्षमता वाले नाथपा झाकड़ी, 1200 मेगावॉट उत्पादन वाले कड़छम वांगतू और 300 मेगावॉट बासपा में विद्युत उत्पादन घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। राज्य की रोजाना विद्युत मांग 1000 मेगावॉट यानी 2.40 लाख यूनिट प्रतिदिन है। बिजली बोर्ड 22 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन करता है। सरकार ने दो साल पहले उत्तर प्रदेश को 200 करोड़ रुपए मूल्य की बिजली बेची थी। अब सरकार के बिजली देने से इनकार कर दिया है। 
 
सवा करोड़ रह गई आमदनी
 
1500 मेगावॉट क्षमता की नाथपा झाकड़ी जल विद्युत परियोजना से प्रबंधन को पीक सीजन में बिजली उत्पादन से रोजाना 6 करोड़ रुपए की आमदनी होती थी, लेकिन आजकल घटकर 1.20 करोड़ रुपए रह गई है। 36 लाख यूनिट प्रतिदिन विद्युत उत्पादन करने वाली परियोजना में 8 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली पैदा हो रही है।
 
1200 मेगावाट क्षमता की जेपी कड़छम-वांगतू परियोजना में एक भी टरबाइन के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। चार-पांच घंटे पानी की स्टोरेज करने के बाद चार टरबाइन में से एक चलाया जाता है। 300 मेगावॉट की बासपा परियोजना में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है।
 
कैसे गिरा उत्पादन
 
एसजेवीएनएल अवर महाप्रबंधक कॉपरेरेट विजय कुमार वर्मा ने कहा कि इस बार सर्दियां जल्द शुरू होने के कारण उत्पादन घट गया है। इस समय सतलुज में 80 क्यूमैक्स पानी उपलब्ध है। एक टरबाइन को चलाने के लिए 60 से 70 क्यूमेक्स पानी होना जरूरी है।
 
अभी परेशानी नहीं
 
 
मुख्य सचिव सुदृप्तो राय का कहना है कि मौसम समय से पहले अधिक ठंडा होने के कारण विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन घटा है। सरकार ने लोगों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए पर्याप्त बिजली के लिए नॉर्थ ग्रिड से प्रबंध कर लिया है। अभी परेशानी नहीं होगी।
 
बैंकिंग की बिजली दोगुने रेट पर
 
प्रदेश को बैंकिंग सिस्टम से दोगुना बिजली लेनी पड़ रही है। 45 से 50 लाख प्रति यूनिट विद्युत प्रदेश को मिलनी चाहिए थी, लेकिन जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन घटने से करीब 40 लाख प्रति यूनिट अतिरिक्त बिजली के लिए प्रबंधन करना पड़ रहा है। सरकार को अतिरिक्त विद्युत अगले साल सीजन के दौरान लौटानी पड़ेगी। सरकार ने उतर प्रदेश सरकार को बिजली बेची थी और 200 करोड़ रुपए प्राप्त करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
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